- हाईकोर्ट से पाक्सो का केस खत्म अदालत के समक्ष बोली पीड़िता - अब मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती इंदौर, ईएमएस। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के न्यायाधीश सुबोध अभ्यंकर की एकलपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में आपसी समझौते और विवाह के आधार पर जिला धार के धामनोद थाना में वर्ष 2024 में भारतीय न्याय संहिता, 2023 व पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज एक गंभीर आपराधिक प्रकरण को समाप्त करते हुए मामले में दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया। एकलपीठ ने कहा है कि यदि ट्रायल कोर्ट से कोई प्रतिकूल आदेश आता है, तो यह दोनों पक्षों के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। एकलपीठ ने कहा कि जब दोनों पक्ष सुखपूर्वक वैवाहिक जीवन जी रहे हैं, तो ऐसे में मुकदमे को जारी रखना अनुचित और कठोर होगा। न्यायालय ने यह भी माना कि आगे की कार्यवाही से किसी को कोई लाभ नहीं होगा। धार जिले के मांडव गाँव में रहने वाले याचिकाकर्ता विजय गावद ने उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में पुनरीक्षण याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़े सभी आपराधिक कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की थी। याचिकाकर्ता के खिलाफ धार के धामनोद थाने में भारतीय न्याय संहिता, 2023 और पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी । इसी एफआईआर और उससे जुडी कार्रवाइयों को समाप्त करने उक्त मामला दाखिल किया गया था। मामले में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता विजय गावद और पीड़िता, दोनों ही न्यायालय के समक्ष हाजिर रहे। उन्होंने एकलपीठ को अवगत कराया कि उनके बीच न्यायालय के बाहर समझौता हो चुका है जिसके बाद दोनों ने विवाह कर लिया है। पीड़िता ने स्वयं एकलपीठ के समक्ष कहा कि वह अब मामला आगे नहीं बढ़ाना चाहती लिहाजा उक्त प्रकरणको समाप्त किया जाए। इस दौरान एकलपीठ के समक्ष समझौते के लिए एक आवेदन भी प्रस्तुत किया गया। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मानशि जोशी ने सुप्रीम कोर्ट के इसी प्रव2ति के एक मामले का हवाला दिया, जिसमें समझौते के आधार पर कार्यवाही समाप्त करने के सिद्धांत को स्वीकार किया गया था। उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए याचिकाकर्ता के खिलाफ और उससे जुड़ी सभी आपराधिक कार्यवाही को पूरी तरह से निरस्त कर दिया। अजय पाठक / मोनिका / 04 अप्रैल 2026/ 3.06