- सड़ने से करोड़ों का नुकसान भोपाल,(ईएमएस)। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के दिवटिया और नूरगंज वेयरहाउस में सरकारी लापरवाही के कारण करीब 20 हजार मीट्रिक टन गेहूं पूरी तरह खराब हो गया है। यह अनाज अब न तो खाद्य उपयोग के लायक है और न ही जानवरों के चारे के लिए। लैब टेस्ट में इसे पूरी तरह अमानक घोषित किया गया है। विशेषज्ञों और अधिकारियों ने चेताया है कि लगातार 34 बार कीटनाशक छिड़काव और गोदामों में लंबे समय तक रखे जाने के कारण अनाज से निकल रही तेज बदबू आसपास के लोगों के लिए बीमारी का खतरा पैदा कर रही है। वेयरहाउस में कीटनाशकों के असर से हवा भी प्रदूषित हो गई है और संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है। प्राप्त जानकारी अनुसार इस गेहूं की खरीद 2017 से 2020 के बीच समर्थन मूल्य पर की गई थी, जिसकी कीमत उस समय लगभग 35-36 करोड़ रुपए थी। लेकिन तीन साल तक इसका उठाव न होने और बाद में गोदाम किराया, मेंटेनेंस, परिवहन और कीटनाशक छिड़काव जैसे खर्च जोड़ने के कारण कुल लागत लगभग 150 करोड़ रुपए तक पहुँच गई। मप्र वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक ने चेतावनी दी है कि सड़े गेहूं को तुरंत हटाया जाना चाहिए, अन्यथा आसपास के लोग गंभीर बीमारियों के खतरे में पड़ सकते हैं। वर्तमान में निपटान के लिए दो विकल्प हैं- या तो गेहूं की नीलामी की जाएगी या इसे संपूर्ण रूप से नष्ट किया जाएगा। मप्र वेयरहाउसिंग और एफसीआई की संयुक्त टीम मौके पर निरीक्षण कर सही निर्णय लेगी। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि यह नुकसान गोदाम में चहेतों को फायदा पहुँचाने के लिए खराब गेहूं रखने के कारण हुआ। इस पूरे प्रकरण से सरकारी प्रणाली में गंभीर खामियों का पता चलता है। इस घटना से न केवल करदाताओं का पैसा बर्बाद हुआ है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा मंडरा रहा है। हिदायत/ईएमएस 04अप्रैल26