क्षेत्रीय
04-Apr-2026
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- सीएमएचओ सहित अन्य पर निलंबन के बाद एफआईआर की तैयारी जबलपुर, (ईएमएस)। जिला स्वास्थ्य विभाग में 93 लाख से अधिक के गबन के मामले में कार्रवाई का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय मिश्रा के निलंबन और उन्हें भोपाल संबद्ध किए जाने के बाद अब आरोपियों के खिलाफ पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराने की तैयारी शुरू हो गई है। जांच दल द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आपराधिक मामला दर्ज करने पर विचार किया जा रहा है। विभागीय जांच में खुलासा हुआ है कि 12 फर्जी देयकों के माध्यम से सरकारी राशि का भुगतान किया गया। साइनेज और अन्य सामग्री की आपूर्ति केवल कागजों में दिखाई गई, जबकि वास्तविक रूप से कोई सामग्री स्वास्थ्य केंद्रों तक नहीं पहुंची। फर्जी पावती लगाकर भुगतान कर दिया गया। भोपाल की एक निजी फर्म को नियमों के विरुद्ध 93 लाख 4 हजार 998 रुपये जारी किए गए। जानकारी के अनुसार जिला कार्यक्रम प्रबंधक कार्यालय से 1.33 करोड़ रुपये और नियमित सीएमएचओ कार्यालय से लगभग 3 करोड़ रुपये के क्रय आदेश जारी हुए थे। जांच के दौरान जिला अस्पताल विक्टोरिया के डीपीएमयू कार्यालय से इस मामले से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड और दस्तावेज गायब पाए गए हैं। इसे साक्ष्य मिटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इस प्रकरण में डॉ. संजय मिश्रा के अलावा जिला कार्यक्रम प्रबंधक आदित्य तिवारी और फार्मासिस्ट जवाहर लोधी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का प्रस्ताव नेशनल हेल्थ मिशन के संचालक को भेजा गया है। इससे पहले कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने स्टोर कीपर का प्रभार संभाल रहे फार्मासिस्ट नीरज कौरव को निलंबित कर दिया था। डिप्टी कलेक्टर आरएस मरावी के नेतृत्व में जांच टीम अब उन कर्मचारियों की पहचान कर रही है जिन्होंने फर्जी भौतिक सत्यापन रिपोर्ट तैयार करने में भूमिका निभाई। सूत्रों के अनुसार दस्तावेजों की चोरी, धोखाधड़ी और सरकारी धन के दुरुपयोग की धाराओं में संबंधित फर्म संचालकों और विभागीय अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हो सकता है। प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि प्राथमिकी दर्ज होते ही गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो सकती है। फिलहाल पूरे मामले ने स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा दिया है। सुनील साहू / मोनिका / 04 अप्रैल 2026