-लेख लिखकर बताया भारत कैसे बन सकता है महाशक्ति नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत की राष्ट्रपति द्रौपद्री मुर्मु ने जनजातीय खेल प्रतिभा को देश की अमूल्य धरोहर बताकर कहा कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के बच्चों में अद्भुत नैसर्गिक क्षमता होती है। उन्होंने अपने लेख में बताया कि यदि इन प्रतिभाओं को उचित प्रशिक्षण, संसाधन और मंच मिले, तब भारत खेल महाशक्ति बन सकता है। राष्ट्रपति मुर्मु ने बताया कि गांवों में बच्चे सीमित साधनों के बावजूद खेल के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। वे सूखे पत्तों,बीजों, बांस और कपड़ों से खेल सामग्री बनाकर अभ्यास करते हैं। बिना आधुनिक सुविधाओं के भी उनका उत्साह और ऊर्जा प्रेरणादायक होती है। उन्होंने ओडिशा की युवा तैराक अंजलि मुंडा का उदाहरण देकर बताया कि ऐसी प्रतिभाएं अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही हैं, खासकर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 जैसे आयोजनों के माध्यम से ऐसा हो पा रहा है। उन्होंने जनजातीय समाज में तीरंदाजी की परंपरा का उल्लेख कर संताल हूल और सिद्धो-कान्हू जैसे वीरों को याद किया। साथ ही एकलव्य को प्रेरणा का प्रतीक बताकर कहा कि जनजातीय संस्कृति में खेलों की गहरी जड़ें हैं। राष्ट्रपति ने बताया कि देशभर में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में खेल उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं, जहां आधुनिक प्रशिक्षण उपलब्ध है। खेलो इंडिया अभियान के जरिए जमीनी स्तर से प्रतिभाओं को पहचानकर आगे बढ़ाया जा रहा है, जबकि ‘अस्मिता’ योजना से बेटियों की भागीदारी बढ़ रही है। अंत में उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, टीम भावना और सामाजिक एकता का माध्यम है। जनजातीय युवाओं की ऊर्जा का सही उपयोग कर भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयां छू सकता है। आशीष दुबे / 04 अप्रैल 2026