अंतर्राष्ट्रीय
05-Apr-2026
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वाशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक अत्याधुनिक प्रणाली विकसित की है, जिसे डीप स्पेश नेटवर्क (डीएसएन) कहा जाता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा और उन्नत टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क माना जाता है, जो पृथ्वी और गहरे अंतरिक्ष में मौजूद यानों के बीच संपर्क बनाए रखता है। डीएसएन एक अंतरराष्ट्रीय रेडियो एंटीना नेटवर्क है, जो अंतरिक्ष यानों को निर्देश भेजने के साथ-साथ उनसे मिलने वाले वैज्ञानिक डेटा, तस्वीरें और सिग्नल पृथ्वी तक पहुंचाता है। इस नेटवर्क का संचालन जेट प्रोपुलशन लेबोरेट्री द्वारा किया जाता है। इसकी खासियत यह है कि यह पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों में फैले तीन प्रमुख केंद्रों के जरिए काम करता है, जिससे किसी भी समय अंतरिक्ष यान से संपर्क बना रहता है। डीएसएन के तीन मुख्य स्टेशन गोल्डस्टोन, मेड्रिड और केनबरा में स्थित हैं। ये तीनों केंद्र पृथ्वी पर लगभग 120 डिग्री के अंतर पर स्थापित किए गए हैं, ताकि पृथ्वी के घूमने के बावजूद कोई भी अंतरिक्ष यान पूरी तरह से संपर्क से बाहर न हो सके। जैसे ही एक केंद्र से यान नजर से ओझल होता है, दूसरा केंद्र तुरंत उसका सिग्नल पकड़ लेता है। डीएसएन में विशाल पैराबॉलिक डिश एंटीना लगे होते हैं, जिनमें 70 मीटर व्यास तक के एंटीना शामिल हैं। ये एंटीना अरबों किलोमीटर दूर से आने वाले बेहद कमजोर रेडियो सिग्नलों को भी पकड़ सकते हैं। इसी के जरिए वैज्ञानिक अंतरिक्ष यानों को कमांड भेजते हैं, उनकी स्थिति पर नजर रखते हैं और उनसे प्राप्त डेटा को विश्लेषण के लिए पृथ्वी पर लाते हैं। यह नेटवर्क केवल संचार तक सीमित नहीं है, बल्कि रेडियो एस्ट्रोनॉमी और रडार अनुसंधान में भी अहम भूमिका निभाता है। डीएसएन की मदद से वैज्ञानिक क्षुद्रग्रहों, ग्रहों और उनके उपग्रहों की संरचना और गतिविधियों का अध्ययन कर पाते हैं। इसके जरिए अंतरिक्ष की गहराइयों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल की जाती हैं। आज के समय में मंगल ग्रह पर मौजूद रोवर, वोयागेर जैसे दूरस्थ अंतरिक्ष यान और अन्य कई मिशन पूरी तरह डीएसएन पर निर्भर हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस नेटवर्क के बिना गहरे अंतरिक्ष में भेजे गए यानों से संपर्क बनाए रखना लगभग असंभव हो जाएगा। डीप स्पेस नेटवर्क की वजह से ही वैज्ञानिक पृथ्वी के ऊर्जा संतुलन, सौर मंडल की संरचना और ब्रह्मांड के रहस्यों को बेहतर ढंग से समझ पा रहे हैं। यह तकनीक भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो रही है और मानव को अंतरिक्ष की नई सीमाओं तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही है। जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी से लाखों या करोड़ों किलोमीटर दूर चंद्रमा, मंगल या अन्य ग्रहों की ओर बढ़ते हैं, तब उनसे लगातार संपर्क बनाए रखना वैज्ञानिकों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। सुदामा/ईएमएस 05 अप्रैल 2026