राष्ट्रीय
05-Apr-2026
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-यहां राजनीति चुनावी गतिविधि नहीं, रोजमर्रा की जिंदगी है, सीएम विजयन भी यहीं से निकले तिरुवनंतपुरम,(ईएमएस)। केरल के कन्नूर जिले में अरब सागर से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित पिनाराई गांव सिर्फ एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि एक जीवंत राजनीतिक विचारधारा का केंद्र है। तीन नदियों से घिरा यह गांव राज्य के सीएम पिनाराई विजयन की जन्मस्थली है और उनके नाम का उपनाम भी इसी गांव से जुड़ा है। पिनाराई का ऐतिहासिक महत्व भी कम नहीं है। जानकारी के मुताबिक वर्ष 1939 में यहां के पारापरम इलाके में एक गुप्त बैठक के जरिए केरल में कम्युनिस्ट आंदोलन की नींव रखी गई थी। उस समय ब्रिटिश शासन ने कम्युनिस्ट गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा रखा था। इस बैठक में ई एम एस नम्बुदरीपाद, ए के गोपालन और पी कृष्णन पल्ली जैसे नेताओं सहित करीब 40 लोगों ने भाग लिया था। यही पहल आगे चलकर भारत की पहली लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई कम्युनिस्ट सरकार की आधारशिला बनी। गांव में प्रवेश करते ही इसकी राजनीतिक पहचान स्पष्ट हो जाती है। सड़कों और इमारतों पर लाल झंडे, चे ग्वेरा और भगत सिंह के पोस्टर और सीएम विजयन के बड़े कटआउट यहां आम बात हैं। यहां राजनीति केवल चुनावी गतिविधि नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक पिनाराई विकास के मामले में भी आगे है। गांव में आधुनिक सुविधाओं से युक्त अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, आईटीआई और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बड़े केंद्र मौजूद हैं। महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय है ज्यादातर महिलाएं शिक्षित हैं और किसी न किसी रोजगार से जुड़ी हैं। पिनाराई विजयन यहां से चुनाव लड़ते हैं। गांव में कई वामपंथी दलों के कार्यालय मौजूद हैं, जो इसकी मजबूत राजनीतिक संरचना को दर्शाते हैं। पारापरम स्थित एक लाइब्रेरी सामुदायिक जीवन का केंद्र है, जहां शाम को लोग इकट्ठा होकर राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। पिनाराई विजयन का घर भी इसी गांव में है, जहां आम लोगों की आवाजाही बनी रहती है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए लोग सीधे यहां पहुंचते हैं और उन्हें नियमानुसार मदद मिलती है। 1945 में एक साधारण मजदूर परिवार में जन्मे विजयन का यह गांव आज भी उनकी जड़ों और विचारधारा से जुड़ा है। 1939 की ऐतिहासिक बैठक की याद में बना स्मारक आज भी यहां के लोगों के लिए गर्व का प्रतीक है। पिनाराई आज केवल एक गांव नहीं, बल्कि राजनीतिक चेतना, सामुदायिक जीवन और वैचारिक प्रतिबद्धता का जीवंत उदाहरण बन चुका है। सिराज/ईएमएस 05 अप्रैल 2026