चंडीगढ़(ईएमएस)। अंकित ने 10 सितंबर 2025 को अपनी आखिरी कॉल में जो आपबीती सुनाई थी, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली थी। उसने बताया था कि उन्हें रूसी कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्र सेलिडोव में रखा गया है और उन्हें वापस जाने की अनुमति नहीं दी जा रही। जब युवाओं ने घर लौटने की जिद की, तो रूसी अधिकारियों ने बंदूक की नोक पर उन्हें धमकाया कि उनके पास केवल मरने या मारने का ही विकल्प है। अंकित के अनुसार, उनका समूह केवल ब्रेड और जैम पर गुजारा कर रहा था और उसके पांच साथियों की मौत उसकी आंखों के सामने हो चुकी थी। हरियाणा के फतेहाबाद जिले के कुम्हारिया गांव में आज हर आंख नम है और हवा में भारी सन्नाटा पसरा है। बेहतर भविष्य और परिवार की खुशहाली का सपना लेकर विदेश गए 23 वर्षीय अंकित जांगड़ा की अस्थियां और अवशेष जब शनिवार को उसके पैतृक गांव पहुंचे, तो पूरे इलाके में मातम छा गया। यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि उन सैकड़ों भारतीय युवाओं की सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान है, जो रोजगार के झांसे में आकर युद्ध की विभीषिका के बीच फंस गए हैं। अंकित फरवरी 2025 में स्टडी वीजा पर मॉस्को गया था, जहां उसने एक लैंग्वेज कोर्स में दाखिला लिया। अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए वह एक रेस्टोरेंट में पार्ट-टाइम काम करने लगा। इसी दौरान एक महिला एजेंट ने उसे और उसके दोस्त विजय पूनिया को ऊंचे वेतन वाली सुरक्षित नौकरियों का लालच दिया। लेकिन यह लालच उनके लिए मौत का सफर साबित हुआ। पढ़ाई और सामान्य नौकरियों के बहाने गए इन युवाओं को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर लिया गया और युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। अंकित के परिवार ने उसे बचाने के लिए विदेश मंत्रालय, रूसी दूतावास और कई राजनेताओं से गुहार लगाई, लेकिन युद्ध की जटिलताओं के बीच कोशिशें नाकाम रहीं। अब परिवार का एकमात्र सहारा अंकित की अस्थियां हैं और उनकी सबसे बड़ी चिंता अंकित के दोस्त विजय पूनिया को लेकर है, जिसका अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। यह घटना रूस में भारतीय युवाओं की जबरन भर्ती के एक खतरनाक पैटर्न को उजागर करती है, जहां संदिग्ध एजेंट सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को निशाना बना रहे हैं। ग्रामीण अब सरकार से उन धोखेबाज एजेंटों पर सख्त कार्रवाई और लापता युवाओं की सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/05अप्रैल2026