अंतर्राष्ट्रीय
05-Apr-2026


वाशिंगटन,(ईएमएस)। सोशल मीडिया पर हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेहत को लेकर अफवाहें तेज़ी से फैली। दावा किया गया कि किसी मेडिकल इमरजेंसी के कारण उन्हें तुरंत मिलिट्री मेडिकल सेंटर ले जाया गया। हालांकि, जांच के बाद यह पूरी तरह फर्जी और बेबुनियाद साबित हुआ। अफवाहें पुराने वीडियो से फैलीं, जिसमें ट्रंप के काफिले को 2024 में बटलर में हुए हमले के समय दिखाया गया था। पुराने वीडियो को वर्तमान घटना बताकर वायरल किया गया। व्हाइट हाउस ने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप कहीं नहीं गए हैं और उन्होंने अपना पूरा वीकेंड ओवल ऑफिस में कामकाज निपटाते हुए बिताया। भ्रम की शुरुआत प्रेस लिड से हुई, जो अमेरिकी प्रशासन में पत्रकारों को सूचित करता है कि दिन भर कोई नई सार्वजनिक गतिविधि नहीं होगी। कुछ लोगों ने इस किसी बड़ी आपात स्थिति के संकेत के रूप में लिया और अफवाहें फैल गईं। घटना का सटीक पता ग्रोक एआई और अन्य फैक्ट-चेकर्स ने लगाया, जिन्होंने वायरल वीडियो की जाँच करके पाया कि यह जुलाई 2024 का है। व्हाइट हाउस के बाहर मरीन की उपस्थिति ने स्थिति और स्पष्ट की। प्रोटोकॉल के अनुसार, ड्यूटी पर तैनात मरीन का मतलब होता है कि राष्ट्रपति परिसर के अंदर सुरक्षित हैं। इसके बाद व्हाइट हाउस ने ट्रैवल और फोटो लिड जारी कर पुष्टि की कि राष्ट्रपति परिसर में हैं, बस सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आएंगे। व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन चेंग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी लोगों के लिए लगातार काम कर रहे हैं और इतिहास में किसी अन्य राष्ट्रपति ने इतनी मेहनत नहीं की। ईस्टर वीकेंड पर भी उन्होंने ओवल ऑफिस और व्हाइट हाउस में काम जारी रखा। इस तरह सोशल मीडिया पर फैली अफवाह केवल पुराने वीडियो और सामान्य प्रशासनिक सूचना के गलत व्याख्यान पर आधारित थी। इस पूरे मामले ने यह दिखाया कि सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि वाली जानकारी कितनी तेजी से फैल सकती है और पुराने फुटेज को वर्तमान का बताकर भ्रम फैलाना कितना आसान है। व्हाइट हाउस की त्वरित सफाई ने लोगों को सच्चाई से अवगत कराया। इस घटना ने यह भी रेखांकित किया कि प्रेस लिड जैसी प्रशासनिक घोषणाओं को समझने में सावधानी बरतनी चाहिए और अफवाहों पर भरोसा करने से पहले हमेशा स्रोत की पुष्टि करनी चाहिए। आशीष दुबे / 05 अप्रैल 2026