आंध्र हाईकोर्ट ने एंडोमेंट डिपार्टमेंट के सर्कुलर को लागू करने को कहा अमरावती,(ईएमएस)। आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने विदेश यात्रा करने वाले पुजारियों के मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश पर बड़ा फैसला लिया है। आंध्र प्रदेश कोर्ट ने एंडोमेंट डिपार्टमेंट के उस सर्कुलर को लागू करने का आदेश दिया, जिसमें बताया गया हैं कि विदेश गए पुजारी मुख्य गर्भगृह में पूजा नहीं कर सकते। आंध्र हाईकोर्ट ने आदेश में स्पष्ट किया कि मंदिरों के रीति-रिवाज और त्यौहार आगम शास्त्र और परंपराओं के अनुसार ही संपन्न होने चाहिए। आध्रं हाईकोर्ट ने एंडोमेंट डिपार्टमेंट के प्रधान सचिव और कमिश्नर को धार्मिक परिषद और श्रृंगेरी शारदा पीठम की गाइडलाइंस लागू करने का निर्देश दिया। न्यायाधीश जस्टिस निम्मगड्डा वेंकटेश्वरलू ने इस संबंध में आदेश जारी किया। मामला विजयवाड़ा के दुर्गा मल्लेश्वर स्वामीवरला मंदिर से जुड़ा था, जिसमें श्री चक्र नववर्ण अर्चना परायणदार सुब्रह्मण्यम ने याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ता का कहना था कि 10 नवंबर 2010 के सर्कुलर के अनुसार विदेश यात्रा कर चुके पुजारी गर्भगृह में प्रवेश नहीं कर सकते। याचिकाकर्ता के वकील के.आर.श्रीनिवास ने बताया कि सिर्फ खानदानी और अनुशासित पुजारी ही मुख्य गर्भगृह में पूजा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी यात्रा करने वाले पुजारियों को मंदिर के बाहर पूजा और व्रत के लिए अनुमति है, लेकिन गर्भगृह में प्रवेश की इजाजत नहीं है। श्रृंगेरी शारदा पीठम के महातीर्थ भारतीस्वामी के स्टैंडर्ड के अनुसार, गर्भगृह में जाने वाले पुजारी को तीन दिन की संध्या वंदना, गुरु उपदेश, मंत्र जाप, वैदिक अध्ययन और कड़ा आध्यात्मिक अनुशासन पूरा करना अनिवार्य है। स्टैंडर्ड में कहा गया कि जो पुजारी विदेश गए हैं और जिन्होंने परंपराओं के खिलाफ अपने बाल कटवाए हैं, उन्हें पवित्र स्थान में प्रवेश करने और पूजा करने की अनुमति नहीं होगी। एंडोमेंट डिपार्टमेंट के वकील ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि सर्कुलर और स्टैंडर्ड का पालन किया जाएगा। इस फैसले से मंदिरों में परंपराओं और आगम शास्त्रों का सम्मान सुनिश्चित होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक रीति-रिवाज और पूजा विधियों में किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। इस आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि विदेश यात्रा करने वाले पुजारियों को मुख्य मंदिर के गर्भगृह में पुजारी के रूप में सेवा करने की अनुमति नहीं है, और उन्हें केवल बाहरी पूजा कार्यों तक ही सीमित रखा जाएगा। इस तरह हाईकोर्ट ने मंदिरों में धार्मिक अनुशासन और परंपरा बनाए रखने के लिए एंडोमेंट डिपार्टमेंट और धार्मिक संस्थाओं की गाइडलाइंस का पालन अनिवार्य कर दिया है। आशीष दुबे / 05 अप्रैल 2026