अंतर्राष्ट्रीय
06-Apr-2026


-ईरान में लापता अमेरिकी पायलट 7000 फीट की पहाड़ी पर चढ़कर छिपा वाशिंगटन,(ईएमएस)। ईरान में ऑपरेशन के दौरान अमेरिकी फाइटर जेट एफ15 ई स्ट्राइक ईगल में पायलट सवाल था। तभी ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम के रडार में आने के बाद ईरानी मिसाइल का शिकार हो गया, लेकिन गनीमत यह रही कि पायलट और उसके सहयोगी फाइटर जेट के क्रैश होने से पहले ही पैराशूट से नीचे कूद गए। इस दौरान अमेरिकी सैनिकों ने फाइटर जेट के मेन पायलट का तो रेस्क्यू कर लिया लेकिन उसका सहयोगी वेपन सिस्टम ऑफिसर लापता हो गया। काफी मशक्कत के बाद शनिवार रात को अमेरिकी सेना ने उसे भी रेस्क्यू कर लिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह ऑपरेशन बहुत खतरनाक था, जिसे अमेरिकी सेना ने अंजाम दिया। एक तरफ जहां इस मिशन में अमेरिका और इजराइल के एलट कमांडो फोर्स, स्पेशल ऑपरेशन विमानों और हेलीकॉप्टर्स को लगाया गया तो वहीं दूसरी तरफ पायलट का सहयोगी दुश्मन से घिरकर जिंदगी और मौत के बीच खड़ा था। हालांकि अमेरिकी सैनिकों ने अपने इस ऑफिसर को खतरनाक ऑपरेशन के बाद आखिरकार ईरान की जमीन से बचा लिया। अब इस ऑफिसर ने ईरान में दुश्मनों और मौत के बीच गुजारे अपने 24 घंटे के बारे में बताया। जिससे पता चला कि कैसे ईरानी मिसाइल का शिकार होने के बाद लापता हुए इस पायलट ने दुश्मनों को चकमा देकर खुद की जान बचाई। दरअसल ईरान की सेना ने अमेरिका के एक एफ1-15 ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट को मार गिराया। इस फाइटर जेट में एक पायलट था और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर। फाइटर जेट क्रैश होते ही किसी तरह से अमेरिका के इन दोनों सैनिकों ने खुद को इस विमान से इजेक्ट किया और उसके बाद पैराशूट की मदद से ईरान के पहाड़ों में जा गिरे। ईरान की सेना दोनों अमेरिकी सैनिकों को जिंदा पकड़ना चाहती थी। इसीलिए ईरान की सेना ने लोगों से भी मदद करने को कहा। ईरान की सेना ने सैनिकों को जिंदा पकड़ने के लिए 60 हजार अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा का इनाम घोषित किया था। ईरान की सेना और लोग धीरे-धीरे इन सैनिकों के पास पहुंच रहे थे यानी अमेरिका के पास रेस्क्यू के लिए बहुत कम समय था, लेकिन अमेरिका ने आखिरी वक्त में अपने इन दोनों सैनिकों को बचा लिया। रिपोर्ट के मुताबिक यह वेपन सिस्टम ऑफिसर पहाड़ की दरार में छिपते हुए लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा ताकि ईरान की उन सर्च टीमों को चकमा दिया जा सके जो उसकी जगह के बेहद करीब पहुंच रही थी। इस दौरान अमेरिकी पायलट एक जगह समुद्र तल से लगभग 7000 फीट ऊंची पहाड़ी चोटी पर चढ़कर छिप गया ताकि उसके बचने और बचाए जाने की संभावना बढ़ सके। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक अमेरिकी पायलट की हर हरकत और रियल टाइम पर नजर रखी जा रही थी। अधिकारी लगातार खतरे को भांपते रहे और पायलट को सुरक्षित निकालने के लिए सही वक्त का इंतजार करते रहे। ईरान में फंसा एयरमैन कभी भी पूरी तरह से रडार की पहुंच से बाहर नहीं हुआ। क्योंकि उसके पास मौजूदा बीकेन की मदद से अमेरिकी सेना उस पर लगातार नजर बनाए हुए भी। भले ही ईरानी सैनिक उसके करीब पहुंच रहे थे लेकिन अमेरिकी सैनिकों को इस बात का पूरा यकीन था कि वह वक्त से पहले अपने साथी को सही सलामत वहां से निकाल लेंगे और ऐसा हुआ भी। अमेरिकी सैनिकों ने इस कठिन ऑपरेशन को अंजाम देकर अपने सहयोगी को ईरान से बाहर निकाल ही लिया। ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया। जिसमें सैकड़ों अमेरिकी कमांडो शामिल थे। बता दें ईरान और अमेरिका के बीच 28 फरवरी को शुरू हुई यह जंग अब तक जारी है और यह जंग और भी ज्यादा घातक हो सकती है क्योंकि ईरान ने मिडिल ईस्ट में मौजूद कई अमेरिकी सेना ठिकानों को तबाह कर दिया है। इसके साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोस को भी बंद कर दिया, जिसके बाद से दुनिया भर में तेल और गैस के लिए हाहाकार मचा है और अमेरिका लगातार ईरान को अल्टीमेटम दे रहा है कि अगर उसने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मोंस नहीं खोला तो ईरान में वो पहले से भी ज्यादा तबाही मचाएगा लेकिन ट्रंप की धमकी के बावजूद ईरान भी लगातार इजराइल और अमेरिका के ठिकानों पर लगातार मिसाइलें और ड्रोन से हमले कर तबाही मचा रहा है। सिराज/ईएमएस 06अप्रैल26 --------------------------------