-पोलियो के बावजूद 1 लाख से ज्यादा कैंसर मरीजों का किया इलाज -व्हीलचेयर पर रहकर भी चिकित्सा क्षेत्र में बने मिसाल रायपुर,(ईएमएस)। पद्मश्री से सम्मानित वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ सुरेश आडवाणी ने अपने जीवन और अनुभवों से एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया है। पोलियो से प्रभावित होने के बावजूद उन्होंने न केवल डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया, बल्कि 50 वर्षों के करियर में व्हीलचेयर पर रहते हुए 1 लाख से अधिक कैंसर मरीजों का इलाज भी किया। डॉ. आडवाणी भारत में बोन मैरो ट्रांसप्लांट करने वाले पहले ऑन्कोलॉजिस्ट माने जाते हैं। रायपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, जीवनशैली और आधुनिक चिकित्सा से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी राय साझा की। इस अवसर पर डॉ आडवाणी ने युवाओं के बीच बढ़ते प्रोटीन पाउडर और सप्लीमेंट्स के चलन पर चिंता जताई। उनका कहना है कि इन उत्पादों के दुष्प्रभावों पर अभी पर्याप्त शोध उपलब्ध नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ के तौर पर वे इन्हें स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक मानते हैं। डॉ. आडवाणी ने यह भी बताया कि कई गंभीर बीमारियों की जड़ बचपन की आदतों और असंतुलित जीवनशैली में छिपी होती है। वसायुक्त भोजन, शारीरिक गतिविधि की कमी और गलत दिनचर्या आगे चलकर मोटापा, कैंसर और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा देती है। देर से शादी भी ब्रेस्ट कैंसर का एक कारण महिलाओं के स्वास्थ्य पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में कैंसर के पैटर्न अलग-अलग हैं। ग्रामीण इलाकों में कम उम्र में शादी और अधिक प्रसव के कारण सर्वाइकल कैंसर के मामले ज्यादा होते हैं, जबकि शहरों में देर से शादी और कम बच्चों के कारण ब्रेस्ट कैंसर का खतरा अधिक देखा जाता है। उन्होंने संतुलित जीवनशैली अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि शादी और परिवार नियोजन का सही समय भी स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है। एआई को बताया दूसरा दिमाग आधुनिक तकनीक पर बोलते हुए डॉ. आडवाणी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को डॉक्टरों के लिए “दूसरे दिमाग” के समान बताया। उनके अनुसार, एआई मेडिकल डेटा का सटीक विश्लेषण कर सकता है और उपचार प्रक्रिया को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है। इस तरह कह सकते हैं कि डॉ. सुरेश आडवाणी का जीवन यह साबित करता है कि दृढ़ संकल्प और सेवा भावना के साथ किसी भी बाधा को पार कर समाज में बड़ा योगदान दिया जा सकता है। हिदायत/ईएमएस 06अप्रैल26