अंतर्राष्ट्रीय
07-Apr-2026
...


-डर था ईरान के हाथ न लग जाएं सीक्रेट उपकरण, खुद नष्ट किए विमान वाशिंगटन,(ईएमएस)। ईरान में फंसे पायलट को निकालने के लिए अमेरिका को करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका ने इस अभियान में अपने ही विमान को उड़ा दिया। पहाड़ों में छिपे अपने पायलट को निकालने के लिए अमेरिका ने बेहद जटिल अभियान चलाया था। वहीं ईरान ने पायलट को पकड़ने पर इनाम रखा था। ऐसे में ईरान की सेना और आम लोग पायलट को ढूंढने निकल पड़े थे। अभियान के दौरान दो ब्लॉक हॉक हेलिकॉप्टरों पर ईरान ने हमला किया। वहीं दो ट्रांसपोर्ट विमानों में तकनीकी खामी आ गई। इसके बाद ये विमान उड़ान भरने में सक्षम नहीं थे। इसलिए उन्हें अमेरिकी सेना ने खुद ही नष्ट करने का दावा किया। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो रेतीली जमीन में लैंडिंग या फिर किसी तकनीकी खामी की वजह से अमेरिका के लॉकहीड मार्टिन सी-130 विमान उड़ान नहीं भर पा रहे थे। अमेरिका को डर था कि अगर इन विमानों को इसी हालत में छोड़ दिया तो विमान के साथ ही ईरान के हाथ कई दुर्लभ और सीक्रेट उपकरण लग जाएंगे। इसको देखते हुए अमेरिकी सेना ने दोनों विमानों को उड़ा दिया। ईरान ने विमान के बिखरे हुए पार्ट्स का वीडियो साझा करते हुए इसे नष्ट करने का दावा किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन विमानों की कीमत 10 करोड़ डॉलर के आसपास थी। रिपोर्ट के मुताबिक विमान के मलबे में बोइंग एमएच-6 लिटल बर्ड इंजन पाया गया। आम तौर पर इसका इस्तेमाल एमसी-130 जे में किया जाता है। पाकिस्तान के एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के खिलाफ चलाए गए अभियान में भी ऐसे ही हालात बने थे। इसके बाद अमेरिकी सेना ने अपने ही विमान को उड़ा दिया था। इन विमानों में अमेरिका की खास तकनीक का इस्तेमाल किया गया था। इसके अलावा एडवांस नेविगेशन सिस्टम भी लगा हुआ था। सोशल मीडिया पर किए गए दो पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि इस अभियान में अमेरिका को पूरी तरह चुप रहना पड़ा, ताकि मिशन खतरे में न पड़े। इस दौरान ट्रंप और उनके प्रशासन के शीर्ष अधिकारी लगातार पायलट की लोकेशन पर नजर रखे हुए थे। उन्होंने कहा कि यह अभियान किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। वाइट हाउस और पेंटागन ने शुरुआती दुर्घटना के बाद 24 घंटे से ज्यादा समय तक लड़ाकू विमान के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी नहीं दी, खासकर पहले पायलट के बचाव अभियान को लेकर। बाद में ट्रंप ने बताया कि ईरान में दिन के उजाले में सात घंटे तक यह अभियान चलाया गया। सिराज/ईएमएस 07 अप्रैल 2026