-लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने पर जोर, संसद से सर्वसम्मति से निर्णय लेने की अपील नई दिल्ली,(ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल का आह्वान करते हुए महिला आरक्षण को देश के लोकतांत्रिक विकास का महत्वपूर्ण कदम बताया है। अपने एक विस्तृत लेख में उन्होंने कहा कि भारत 21वीं सदी में एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां समानता, समावेशन और जनभागीदारी को नई दिशा देने का अवसर सामने है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आने वाले समय में संसद को एक महत्वपूर्ण दायित्व निभाना है, जिससे लोकतंत्र अधिक प्रतिनिधिक और व्यापक बन सके। महिला आरक्षण से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिलेगा। उन्होंने इसे केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह ऐतिहासिक अवसर ऐसे समय में आ रहा है, जब देश में विभिन्न सांस्कृतिक और धार्मिक पर्वों का उत्सव मनाया जा रहा है। असम में रोंगाली बिहू, ओडिशा में पणा संक्रांति, पश्चिम बंगाल में पोइला बैशाख, केरल में विषु, तमिलनाडु में पुथांडु और उत्तर भारत में बैसाखी जैसे त्योहार नई ऊर्जा और आशा का संदेश दे रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने 11 अप्रैल से शुरू होने वाली महात्मा ज्योतिराव फुले की जयंती और 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि ये तिथियां सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों की प्रेरणा देती हैं। इसी क्रम में 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर चर्चा और पारित करने का प्रयास होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश की लगभग आधी आबादी होने के बावजूद महिलाओं का प्रतिनिधित्व राजनीति में अपेक्षाकृत कम है। उन्होंने जोर दिया कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से न केवल निर्णय प्रक्रिया समृद्ध होगी, बल्कि शासन की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, लेकिन अब समय है कि उन्हें विधायी संस्थाओं में भी उचित स्थान मिले। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से इस मुद्दे पर सहमति बनाकर राष्ट्रहित में निर्णय लेने की अपील की। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश के अंत में कहा कि यह केवल एक नीति नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी भारत बनाने की दिशा में सामूहिक संकल्प है। हिदायत/ईएमएस 09अप्रैल26