राष्ट्रीय
07-Apr-2026


:: बच्चा चोरी के संदेह में पिटाई की बात आई सामने; पुलिस ने बताया- आपसी विवाद और गलतफहमी का मामला :: इंदौर (ईएमएस)। मशहूर शाह बानो कानूनी मामले पर किताब लिखने के प्रोजेक्ट के सिलसिले में इंदौर आई एक महिला ने भीड़ द्वारा मारपीट और दुर्व्यवहार का गंभीर आरोप लगाया है। महिला का दावा है कि करीब दो माह पूर्व जब वह शाह बानो के परिजनों से मिलने खजराना क्षेत्र पहुंची थी, तब उसे बच्चा चोर समझकर भीड़ ने निशाना बनाया। हालांकि, इंदौर पुलिस ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए किसी भी तरह के मॉब लिंचिंग या भीड़ के हमले की घटना से साफ इनकार किया है। सोमवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित हुआ, जिसमें महिला यह कहती सुनी जा रही है कि वह फरवरी माह में दिवंगत शाह बानो के परिजनों से मिलने इंदौर आई थी। उसका उद्देश्य 1985 के ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले और शाह बानो के कानूनी संघर्ष पर एक किताब लिखना था। गौरतलब है कि इंदौर निवासी शाह बानो का गुजारा भत्ते के लिए लड़ा गया मामला भारतीय कानूनी इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाता है। :: किताब के अनुबंध और पैसों को लेकर विवाद :: इंदौर से बाहर रहने वाली इस महिला ने आरोप लगाया कि किताब के अनुबंध को लेकर शाह बानो के परिजनों ने अवास्तविक पैसों की मांग की थी। जब उसने इस पर आपत्ति जताई, तो उनके बीच तीखी नोकझोंक हुई। महिला का आरोप है कि इसी विवाद के दौरान एक व्यक्ति ने उसे बच्चा चोर कह दिया, जिससे वहां मौजूद भीड़ उग्र हो गई और उसके साथ मारपीट की गई। :: पुलिस का पक्ष : डेटा चोरी को समझा बेटा चोरी :: खजराना थाना प्रभारी मनोज सिंह सेंधव ने भीड़ द्वारा हमले के आरोपों को असत्य करार दिया है। उन्होंने बताया कि महिला और शाह बानो के परिवार के बीच पुस्तक अनुबंध को लेकर विवाद हुआ था। सूचना मिलते ही पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची थी। उस समय दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से लिखित में दिया था कि वे एक-दूसरे के विरुद्ध कोई कानूनी कार्यवाही नहीं चाहते हैं। वहीं, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त राजेश दंडोतिया ने स्पष्ट किया कि विवाद के दौरान महिला पर डेटा चोरी का आरोप लगाया गया था। वहां मौजूद कुछ लोगों ने इसे गलत समझकर बेटा चोरी (बच्चा चोरी) समझ लिया, जिससे कुछ समय के लिए भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी। आपसी समझौते के कारण पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। :: ऐतिहासिक रहा है शाह बानो मामला :: बता दें कि 1978 में इंदौर निवासी शाह बानो ने अपने पति मोहम्मद अहमद खान से तलाक के बाद गुजारा भत्ते के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की थी। 1985 में उच्चतम न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। हालांकि, बाद में तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 1986 पारित कर इस फैसले के प्रभाव को बदल दिया था। शाह बानो का निधन 1992 में हुआ था। प्रकाश/07 अप्रैल 2026