व्यापार
08-Apr-2026


मुंबई (ईएमएस)। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमानित 7.6 प्रतिशत से कम है। आरबीआई ने इसे पश्चिम एशिया संकट, जिंस की ऊंची कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी वैश्विक चुनौतियों से जोड़कर बताया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि प्रमुख समुद्री मार्गों में व्यवधान और बढ़ी हुई ढुलाई एवं बीमा लागत से माल निर्यात पर दबाव पड़ सकता है। ऊर्जा और अन्य जिंस की ऊंची कीमतें, साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान, घरेलू उत्पादन की गति को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता भी वृद्धि संभावनाओं पर दबाव डाल रही है। मल्होत्रा ने बताया कि घरेलू मांग को कई कारक समर्थन देंगे- * सेवा क्षेत्र की मजबूती * माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों का युक्तिकरण * विनिर्माण क्षेत्र में क्षमता उपयोग में वृद्धि * वित्तीय संस्थानों और कॉरपोरेट के मजबूत बही-खाते इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2026-27 में रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के सरकारी प्रयास दीर्घकालिक वृद्धि के लिए सकारात्मक हैं। तिमाही आधार पर वृद्धि का अनुमान- आरबीआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में तिमाही आधार पर वृद्धि दर का अनुमान इस प्रकार है- * पहली तिमाही: 6.8 फीसदी * दूसरी तिमाही: 6.7 फीसदी * तीसरी तिमाही: 7.0 फीसदी * चौथी तिमाही: 7.2 फीसदी सतीश मोरे/08अप्रेल ---