-टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने और प्रथम नियुक्ति दिनांक से सेवा गणना की गुना (ईएमएस)। मध्य प्रदेश अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा जिला इकाई गुना के बैनर तले बुधवार को जिलेभर के शिक्षकों ने कलेक्टोरेट पहुंचकर अपनी लंबित मांगों को लेकर हुंकार भरी। शिक्षकों ने प्रदेश सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर संजीव खेमरिया को सौंपा। ज्ञापन में मुख्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को समाप्त करने और सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई है। शिक्षक नेताओं ने ज्ञापन के माध्यम से बताया कि आयुक्त, लोक शिक्षण संचालनालय और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा प्रदेश के समस्त नॉन-टीईटी शिक्षकों को पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने हेतु जो निर्देश जारी किए गए हैं, वे पूरी तरह से नियम विरुद्ध हैं। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की 24 अगस्त 2010 की अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि अधिसूचना की कंडिका 4 और 5 के अनुसार, 3 सितंबर 2001 के पहले और बाद में नियुक्त शिक्षकों के साथ-साथ वर्ष 2011 से 2014 के बीच गुरुजी से संविदा शिक्षक बने शिक्षकों को टीईटी से स्पष्ट छूट प्रदान की गई है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों में भी इस छूट का स्पष्ट उल्लेख है, इसके बावजूद विभाग द्वारा शिक्षकों को परीक्षा के लिए बाध्य करना उनके साथ मानसिक प्रताड़ना है। संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि 2 मार्च 2026 और 26 मार्च 2026 को जारी किए गए विभागीय आदेशों को तत्काल निरस्त किया जाए, ताकि प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों को इस अनावश्यक तनाव से मुक्ति मिल सके। इसके साथ ही, शिक्षकों की एक पुरानी और ज्वलंत मांग यह भी है कि नवीन शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना उनकी प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए। शिक्षकों का कहना है कि जब तक नियुक्ति दिनांक से सेवा की गणना नहीं होती, तब तक उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अवकाश नकदीकरण जैसे वैधानिक लाभों से वंचित रहना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि पदोन्नति और क्रमोन्नति की भांति इन लाभों को भी सुनिश्चित किया जाए। ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक संघ के पदाधिकारी और जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए शिक्षक मौजूद रहे।-सीताराम नाटानी