राष्ट्रीय
08-Apr-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच घोषित सीजफायर पर भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए उम्मीद जाहिर की कि यह क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा कि भारत लगातार यह मानता रहा है कि किसी भी संघर्ष का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। विदेश मंत्रालय ने इस संघर्ष को लेकर गहरी चिंता भी व्यक्त की है। प्रवक्ता के अनुसार, इस युद्ध ने पहले ही आम लोगों को भारी नुकसान पहुंचाया है और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार नेटवर्क को प्रभावित किया है। विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व रेखांकित किया, जो दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है। इस मार्ग से करीब 20–25 प्रतिशत वैश्विक तेल व्यापार और एलएनजी की आपूर्ति होती है। हालिया तनाव के कारण यहां नौवहन में आई बाधाओं से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला पर नकारात्मक असर पड़ा है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर हैं, इस स्थिति से सीधे प्रभावित होते हैं। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, जिससे भारत की चिंता और बढ़ जाती है। यही कारण है कि भारत ने शुरुआत से ही सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक रास्ता अपनाने की अपील की है। विश्लेषकों के अनुसार, दो सप्ताह का यह युद्धविराम फिलहाल राहत प्रदान कर सकता है, लेकिन स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों के बीच गंभीर और निरंतर वार्ता आवश्यक होगी। अंतरराष्ट्रीय मंचों, जैसे जेनेवा, पर आगे की बातचीत इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कुल मिलाकर, भारत का रुख संतुलित और शांतिपूर्ण है। वह तनाव कम करने, संवाद बढ़ाने और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने पर जोर दे रहा है, साथ ही क्षेत्र में अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत है। आशीष दुबे / 08 अप्रैल 2026