09-Apr-2026


केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में भारत के नक्सल मुक्त होने का ऐलान किया। बड़े पैमाने पर नक्सलमुक्त भारत का उत्सव मनाया गया। संसद में वाहवाही हुई। राष्ट्रीय चैनलों में अमित शाह की घोषणा का लाइव प्रसारण किया गया। लंबे समय तक भारत सरकार ने नक्सली अभियान चलाया। नक्सलियों से आत्मसमर्पण भी कराया। कुछ नक्सलियों को ऊपर भेजा गया।नक्सलवाद खत्म हुआ या नहीं, यह तो समय ही बताएगा।सरकार ने उत्सव मनाकर बाह-बाही जरूर लूट ली है। इसे कहते हैं सरकार चलाने का सफल इवेंट कमजोर ईरान ने पहलवान अमेरिका को दी पटखनी अमेरिका अपने आप को सारी दुनिया का दादा मानता था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अहंकार सर चढ़कर बोल रहा था। टैरिफ के बहाने उन्होंने दुनिया के देशों में अपनी गैंगस्टर की तरह पहचान बनाई। वह शांति दूत बनना चाहते थे। नोबेल पुरस्कार की गुहार लगा रहे थे। इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान की सत्ता पर कब्जा करने के लिए उस पर जब हमला किया। उस समय ईरान सबसे कमजोर था। जो दादागिरी ट्रंप करना चाहते थे। वह तो पूरी नहीं हुई ,47 वर्षों से अमेरिका ईरान पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगाकर पेर रहा था। ईरान के आर्थिक जब हालत खराब थे। उसका फायदा उठाकर ईरान में सत्ता पलटने के लिए आंदोलन चलवाए। कमजोर ईरान ने दुनिया के दादा डोनाल्ड ट्रंप को 34 दिन के युद्ध में दिन में तारे दिखा दिए। इसे कहते हैं ईरान की चींटी मरी, बदले में उसने अमेरिका का हाथी मार दिया है। सारी दुनिया के देश ईरान के चक्रव्यूह की वाहवाही कर रही है। ऑस्ट्रेलिया को संबोधित करेगे धीरेंद्र शास्त्री इसे कहते हैं भाग्य, बागेश्वर पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री 8 से 15 अप्रैल तक ऑस्ट्रेलिया की यात्रा में है। बाबा 14 अप्रैल को विश्व शांति और भारतीय संस्कृति पर ऑस्ट्रेलिया की संसद में संबोधन देंगे। इसके बाद भी हम विश्व गुरु नहीं बन पाए, तो इसके कारण तो हमें खोजना ही चाहिए। हनुमान भक्त धीरेंद्र शास्त्री जिस तरह से देश और विदेश में अपना डंका बज रहे हैं।यह भाग्य देवी देवताओं की कृपा से ही संभव है। बजरंगबली हवा में भी उड़ाते थे। उनके भक्त हवा में उड़ने लगे, तो इसमें आश्चर्य जैसी कोई बात भी नहीं है। असम केरल और पुडुचेरी में मतदान केंद्रीय चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों का विवाद पिछले कई महीने से हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान बिहार विधानसभा के चुनाव हो गए। वहां पर भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर चुनाव जीत गई और सरकार भी बन गई। एसआईआर में मतदाता बढ़ने के स्थान लाखों मतदाताओं के नाम काट दिए गए। पश्चिम बंगाल में आरोप लग रहे हैं 75 फ़ीसदी मुस्लिम मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं।उनके पुरखे और वह भारत में ही जन्मे। कई बार मतदान कर चुके हैं। ऊसके बाद भी मुसलमान होने के कारण उनके नाम कट गए। सुप्रीम कोर्ट अभी तक संवैधानिक रूप से चुनाव आयोग की प्रक्रिया सही है या गलत, यह नहीं बता पाया। सुप्रीम कोर्ट की छत्रछाया में हर राज्य में वोट काटने का काम चल रहा है।इसी बीच विधानसभाओं के चुनाव भी होते जा रहे हैं। असम केरल और पुडुचेरी में मतदान हो गया है। पश्चिम बंगाल के चुनाव भी कुछ दिनों में हो जाएंगे। नामांकन शुरू हो चुके हैं लेकिन मतदाता सूची फाइनल नहीं हुई है। मतदान नागरिकों का संविधान में मौलिक अधिकार है। अब सुप्रीम कोर्ट का रही है। कोई बात नहीं इस बार वोट नहीं दे पाए तो अगले चुनाव में दे देना। इसे कहते हैं समरथ को नहीं दोष गुसाईं। संविधान अपनी जगह है, सरकार अपनी जगह है। सरकार जो चाहेगी वही नौकरों को करना पड़ेगा। नहीं करेंगे तो नौकरी चली जाएगी। (ईएमएस) एसजे/ 9 अप्रैल /2026