09-Apr-2026


संतुलन की कवायद या गुटबाजी पर मरहम जबलपुर, (ईएमएस)। करीब 2 साल के लंबे इंतजार के बाद जबलपुर शहर जिला कांग्रेस कमेटी की 51 सदस्यीय नई कार्यकारिणी की घोषणा ने शहर की सियासत को फिर गरमा दिया है। आधिकारिक तौर पर इसे संगठन को मजबूती देने और आगामी राजनीतिक गतिविधियों को गति देने की पहल बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे गुटीय संतुलन साधने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से शहर कांग्रेस में आंतरिक खींचतान और अलग-अलग नेताओं के समर्थकों के बीच असंतोष की चर्चाएं रही हैं। ऐसे में नई कार्यकारिणी की संरचना पर बारीकी से नजर डालें तो स्पष्ट होता है कि विभिन्न धड़ों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है। उपाध्यक्ष पद पर सरबजीत सिंह रील, मनीष चंसोरिया, संजय अहिरवार, नेम सिंह, अजय रावत, सैयद जमीलउद्दीन (ठाकरे), हुकुम चंद जैन, आलोक गुप्ता, सुबोध पहाडिया और संजय उपाध्याय जैसे नामों को शामिल कर संगठन ने अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों को साधने की कोशिश की है। महासचिव और सचिव पदों पर भी विविध पृष्ठभूमि के नेताओं को जगह दी गई है। डिक्की जॉन, रवीन्द्र कुशवाहा, उमेश लोधी, मुकेश सराफ, अमर चंद बाबरिया, सचिन वाजपेई, निर्मल जैन, आरिफ सिद्दीकी और अन्य नामों की मौजूदगी यह संकेत देती है कि किसी एक गुट को पूरी तरह हावी नहीं होने दिया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सूची सबको साथ लेकर चलने की रणनीति के तहत तैयार की गई है, ताकि भविष्य में संगठनात्मक असंतोष खुलकर सामने न आए। हालांकि, अंदरखाने यह चर्चा भी है कि कुछ दावेदारों को अपेक्षित जिम्मेदारी नहीं मिली, जिससे सीमित स्तर पर नाराजगी की स्थिति बन सकती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नई टीम वास्तव में गुटबाजी पर मरहम साबित होती है या सिर्फ अस्थायी संतुलन। सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति…. नई कार्यकारिणी में सामाजिक संतुलन पर विशेष ध्यान दिए जाने की भी चर्चा है। कोषाध्यक्ष पद पर आरिफ बेग की नियुक्ति और उपाध्यक्ष व सचिव स्तर पर सैयद जमीलउद्दीन, आरिफ सिद्दीकी, कलीम खान, आसिफ कुरेशी, मोहम्मद अल्तमस, असलम खान जैसे नामों को शामिल कर अल्पसंख्यक वर्ग को प्रतिनिधित्व दिया गया है। प्रवक्ता के रूप में रिजवान अली कोटी और सोशल मीडिया प्रभारी के रूप में सैयद मुख्तार अली की नियुक्ति भी इसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। इसके अलावा संजय अहिरवार, केशव कोरी, बालकृष्ण सोनकर जैसे नाम अनुसूचित जाति वर्ग से आते हैं, जबकि रवीन्द्र कुशवाहा, उमेश लोधी, जुम्मन सेन, मिथुन शिवहरे जैसे पदाधिकारियों के माध्यम से ओबीसी वर्ग को साधने का प्रयास दिखता है। जैन समाज से जुड़े हुकुम चंद जैन, निर्मल जैन और सुधीश जैन को जिम्मेदारी देकर व्यापारी वर्ग को भी संदेश देने की कोशिश की गई है। आगामी चुनाव की तैयारी… राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह संरचना आगामी चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जिसमें कांग्रेस शहर की चारों विधानसभा क्षेत्रों में सामाजिक आधार मजबूत करना चाहती है। जाति, वर्ग और अनुभव के मिश्रण से तैयार यह टीम चुनावी वर्ष से पहले संगठनात्मक धरातल को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आगे की चुनौती … अब सबसे बड़ी चुनौती नई कार्यकारिणी के सामने यह होगी कि वह कागजी संतुलन को जमीनी मजबूती में कैसे बदलती है। क्या यह टीम बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ा पाएगी? क्या आंतरिक मतभेदों को वास्तव में समाप्त किया जा सकेगा? और क्या सामाजिक समीकरणों का यह संतुलन वोट में तब्दील हो पाएगा? फिलहाल, कांग्रेस की नई कार्यकारिणी ने शहर की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है। आने वाले महीनों में इसकी सक्रियता और प्रभाव ही तय करेगा कि यह सूची संगठनात्मक एकता की मिसाल बनती है या फिर गुटीय समीकरणों का अस्थायी समझौता साबित होती है। सुनील साहू / शहबाज / 09 अप्रैल 2026/ 05.15