रांची(ईएमएस)।झारखंड हाइकोर्ट ने हजारीबाग में साड़म के टेपसा गांव में पत्थरों के अवैध उत्खनन पर रोक लगाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।चीफ जस्टिस एमएस सोनक व जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी व राज्य सरकार का पक्ष सुना।पक्ष सुनने के बाद खंडपीठ ने माैखिक रूप से कहा कि यह मामला वर्ष 2013 से चल रहा है। इस मामले में अवैध माइनिंग को रोकने के लिए खंडपीठ ठोस आदेश पारित करना चाहती है।इसको देखते हुए खंडपीठ ने प्रार्थी व राज्य सरकार को बुलेट प्वाइंट में अपना सुझाव 17 अप्रैल तक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई के लिए खंडपीठ ने 20 अप्रैल की तिथि निर्धारित की।इससे पूर्व प्रार्थी अधिवक्ता हेमंत कुमार सिकरवार ने खंडपीठ को बताया कि टेपसा गांव में खनन गतिविधि नहीं हो सकती है. वह इको सेंसेटिव जोन में आता है।इको सेंसेटिव जोन में माइनिंग गतिविधि प्रतिबंधित है।उस क्षेत्र में पुलिस जाती है, तो माइनिंग गतिविध बंद हो जाती है।सैकड़ों मुकदमें दर्ज किये गये हैं। अवैध माइनिंग कुछ समय तक रूक जाती है। बाद में फिर शुरू हो जाती है।माइनिंग के कारण वहां विशाल खाई बन गयी है, जिसे भरने का आदेश दिया जाना चाहिए।इसमें जो लागत आयेगी, उसे माइनिंग करनेवालों से वसूल किया जाना चाहिए।उल्लेखनीय है कि प्रार्थी अधिवक्ता हेमंत कुमार सिकरवार ने जनहित याचिका दायर की है।इसमें कहा गया है कि हजारीबाग के ईचाक थाना क्षेत्र के साड़म के टेपसा क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा है। प्रार्थी ने इस पर रोक लगाने की मांग की है। कर्मवीर सिंह/09अप्रैल/26