राज्य
09-Apr-2026


:: संभाग के सभी अस्पतालों की पर्चियों पर दिखेगा संदेश, क्यूआर कोड से सीधे ले सकेंगे प्रतिज्ञा :: इंदौर (ईएमएस)। संभाग में अंगदान के प्रति जागरूकता लाने और इसे एक जन-आंदोलन बनाने की दिशा में संकल्प एक लाख अंगदान से जीवनदान अभियान को बड़ी सफलता मिली है। मिताशा फाउंडेशन के नेतृत्व में आयोजित ऑनलाइन सी.एम.ई. (कॉन्फ्रेंस) में इंदौर संभाग के सभी आठ जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक सुर में इस मुहिम को जमीनी स्तर तक ले जाने का संकल्प लिया। बैठक में सबसे महत्वपूर्ण निर्णय यह लिया गया कि अब सरकारी व निजी अस्पतालों की ओपीडी, आईपीडी और डिस्चार्ज स्लिप पर अंगदान का संदेश और NOTTO का क्यूआर कोड अनिवार्य रूप से अंकित किया जाएगा। संभागायुक्त कार्यालय के ज्वाइंट कमिश्नर डी.एस. यादव और स्वास्थ्य संचालनालय की वरिष्ठ संयुक्त संचालक डॉ. पूर्णिमा गाडरिया की उपस्थिति में हुई इस बैठक में अभियान की रूपरेखा तय की गई। डॉ. गाडरिया ने स्पष्ट किया कि अंगदान की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। बैठक में एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. संजय दीक्षित ने व्यावहारिक चुनौतियों के समाधान सुझाए। :: साप्ताहिक रिपोर्ट से होगी मॉनिटरिंग :: मिताशा फाउंडेशन के आलोक सिंघी ने बताया कि यह अभियान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। संभाग के सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों (बीएमओ) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में होने वाली प्रतिज्ञाओं की साप्ताहिक रिपोर्ट फाउंडेशन को भेजें। सिंघी के अनुसार, फाउंडेशन हर जिले के साथ समन्वय कर इस सामाजिक क्रांति को प्रभावी परिणाम तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। :: ख़ास बातें : जो बदलाव लाएँगी :: डिजिटल प्रतिज्ञा : अस्पतालों की पर्चियों पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करते ही नागरिक सीधे पोर्टल पर अंगदान की शपथ ले सकेंगे। व्यापक भागीदारी : इंदौर के साथ-साथ धार, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर और अलीराजपुर के सीएमएचओ ने भी अपनी कार्ययोजना साझा की। अनिवार्य संदेश : डिस्चार्ज स्लिप पर अंगदान से जीवनदान लिखने का उद्देश्य मरीज और उनके परिजनों को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करना है। :: इनकी रही विशेष उपस्थिति :: बैठक में इंदौर सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी, सिविल सर्जन डॉ. एम.पी. सिंह सहित संभाग के सभी जिलों के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यवस्थित तरीके से समाज को जोड़ा जाए, तो हजारों लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है। प्रकाश/09 अप्रैल 2026