मेण्डोरा की बीना बनी लखपति दीदी भोपाल(ईएमएस)। दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जो ग्रामीण गरीबों, विशेषकर महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से संगठित करके गरीबी दूर कर उनको आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करता है। यह मिशन कृषि, पशुपालन और सूक्ष्म उद्यमों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के विविध अवसर प्रदान करता है। इसी क्रम में म.प्र. डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को सामाज में आत्मनिर्भर एवं सशक्त और विशेष पहचान दिलाने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं से जुड़कर एवं लाभ पाकर भोपाल जिले की महिलाएं सफलता की नई इबारत लिख रही है। शासन की यह योजनाएं महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रही है। महिलाएं आजीविका मिशन से जुड़कर न केवल स्वयं सशक्त हो रही हैं, बल्कि अपने परिवार का आर्थिक स्तर भी ऊंचा उठा रही है। आज ये पिछड़ी महिलाएं सफलता की नई इबारत तो लिख ही रही है साथ ही लखपति दीदी बनने की ओर अपने कदम बढ़ा रही है। भोपाल जिले के मेण्डोरा निवासी- श्रीमती बीना ने विषम परिस्थिति में भी 12वीं तक पढ़ाई पूरी की आज सफलता की नई कहानी लिख रही है। उजाला आजीविका ग्राम संगठन के ओम सांईराम स्व-सहायता समूह से जुड़ने के पश्चात साड़ी की दुकान चला रही है। इसके साथ ही सिलाई-कढ़ाई सेंटर का संचालन कर आर्थिक तौर पर सुदृढ़ हो रही है तथा गांव की दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणादायी बन गई है। आज वे प्रतिमाह अच्छी आय अर्जित कर गांव की लखपति दीदियों में शामिल हो गई हैं। वे बहुत खुश हैं तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को हृदय से धन्यवाद दे रही हैं। बीना ने बताया कि वे एक साधारण ग्रामीण परिवार से की घरेलू महिला है। पारिवारिक समस्याओं के कारण कक्षा 12वीं तक ही हो पाई। परिस्थितियाँ कठिन थीं, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वे बताती है कि शादी के बाद भी उनकी शैक्षणिक योग्यता सीमित थी, उनके पति ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित किया। वे स्वयं सहायता समूह से जुड़कर छोटी-छोटी बचत शुरू की। समूह के माध्यम से उन्होंने 70 हजार रुपये एवं मुख्यमंत्री आर्थिक स्व-रोजगार योजना से 01 लाख रूपये का ऋण मिला, जिससे उन्होंने सिलाई कढ़ाई के कार्य के साथ-साथ साड़ियों की दुकान के माध्यम से अपने व्यापार को आगे बढ़ा रही है। श्रीमती बीना बताती है कि उनका सपना है कि आगे चलकर वे जैविक खेती और अन्य स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से और अधिक लोगों को रोजगार प्रदान कर सकूँ। वे बताती हैं कि आज पूरे आत्मविश्वास के साथ कह सकती हूँ कि सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग, स्वयं सहायता समूह और सरकारी योजनाओं की सहायता से कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। हरि प्रसाद पाल / 09अप्रैल, 2026