10-Apr-2026
...


- पजेशन के बाद जब फ्लैट पर पहुचें तब हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा भोपाल(ईएमएस)। आईसीआईसीआई बैंक में बंधक और कुर्क फ्लैट को एक बिल्डर और उसके पांच साथियों की मदद से बेच दिया गया। मामला बागसेवनिया थाना इलाके का है, मामले में जीरो पर एफआईआर दर्ज करने के बाद केस डायरी भोपाल शहर के बागसेवनिया थाने को भेजी गई। शुरुआती जांच में पुलिस को बारह लाख, 15 हजार रुपए का फर्जीवाड़ा करने की जानकारी मिली है। वहीं आगे की जॉच में आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। बागसेवनिया पुलिस के अनुसार फरियादी राहुल देव गौतम पिता गोपीराम गौतम (28) कोलार रोड स्थित नयापुरा में ज्योति हाईट्स में किराए से रहते हैं। वह मूल रुप से दतिया जिले के रहने वाले हैं। साल 2021 में वह भोपाल आए थे, इस दौरान उनकी प्रशांत मानेश्वर पिता श्रीचंद्र मानेश्वर से पहचान हुई थी। पहचान बढ़ने पर राहुल देव गौतम ने उससे ज्योति हाईट्स में फ्लैट खरीदने की इच्छा जताई थी। जिसके बाद प्रशांत मानेश्वर ने बिल्डर मनोज अग्रवाल पिता ओम प्रकाश अग्रवाल से उसकी मुलाकात कराई। ओम प्रकाश का दफ्तर बागसेवनिया थाना क्षेत्र स्थित विद्या नगर इलाके में हैं। राहुल देव गौतम को फ्लैट नंबर 105 पसंद आया। बातचीत में उसका सौदा बारह लाख में तय किया गया। इसके बाद अप्रैल, 2025 में राहुल देव गौतम ने दो किस्त में 70 हजार रुपए प्रशांत मानेश्वर को दे दिए। फिर अगले महीने बिल्डर मनोज ने अंकुर कुमार दत्ता पिता राकेश कुमार दत्ता के बैंक खाते में जमा कराया। अंकित बिल्डर के साथ कारोबार में पार्टनर भी है। पीड़ित से फ्लैट की रजिस्ट्री कराने के नाम पर डेढ़ लाख रुपए मांगे गए। यह रकम दो बैंक खातों से जुलाई, 2025 में दी गई। इसके बाद आरोपियों ने उससे फ्लैट में बिजली मीटर के लिए 15 हजार रुपए और मांगे जो उसने प्रशांत मानेश्वर को दी थी। बाद में रजिस्ट्री कराने के लिए मनोज कुमार सिंह पिता संतप्रसाद सिंह आया था। उसे बिल्डर ने अपना पार्टनर बताकर हकीम सेल्स कंपनी की तरफ से संपति का कस्टोडियन बताया था। उसी दिन मनोज कुमार सिंह ने उसे पजेशन लैटर दिया था। पूरा फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ जब पीड़ित खरीदे गए फ्लैट पर पहुंचा। तब उसे जानकारी लगी की जो फ्लैट उसे बेचा गया है, वह जितेंद्र सिंह को बिल्डर ने बेच दिया था। उसने आईसीआईसीआई बैंक से लोन लेकर निर्माण किया था। जिसका भुगतान नहीं करने के कारण उसके अधिकांश फ्लैट कुर्क कर लिए गए थे। जब मनोज अग्रवाल और प्रशांत मानेश्वर से फरियादी ने विरोध किया तब आरोपियो ने उसे झांसा देते हुए कहा की वह दिसंबर, 2025 तक पजेशन दिला देगा। इसके लिये उसने सितंबर, 2025 में एग्रीमेंट भी किया। और उस संपत्ति पर पंद्रह हजार रुपए महीना किराया देने का भी वादा किया था। लेकिन, सभी आरोपी टालमटोल करते रहे। आखिरकार परेशान होकर उसने ई-एफआईआर जीरो में करा दी। इसके बाद बुधवार को पुलिस ने मनोज अग्रवाल, मनोज कुमार सिंह, प्रशांत मानेश्वर, अंकुर कुमार दत्ता और हकीम सेल्स कंपनी को आरोपी बनाते हुए जालसाजी, गबन, गाली-गलौज, धमकाने के अलावा कई अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि मामले में कई अन्य संदेहियों की भूमिका संदिग्ध है। जिनके खिलाफ तथ्य मिलने पर कार्यवाही की जायेगी। जुनेद / 10 अप्रैल