राज्य
10-Apr-2026


गढ़वा(ईएमएस)।दो वक्त की रोटी का जुगाड़ गढ़वा के मजदूरों के लिए काल साबित हो रहा है।जिले के धुरकी थाना क्षेत्र के खुटिया पंचायत अंतर्गत परासपानी (पश्चिम टोला) गांव के आदिम जनजाति मजदूर उपेन्द्र कोरवा (38) की हैदराबाद में काम के दौरान मौत हो गयी। जैसे ही युवक का शव गांव पहुंचा, पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई। आलम यह है कि महज एक सप्ताह के भीतर इसी गांव के दो आदिम जनजाति मजदूरों की मौत बाहर में हो चुकी है, जबकि पिछले दो महीनों में धुरकी के 5 मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं।परिजनों के अनुसार, उपेंद्र एक साल पहले गांव के ही एक ठेकेदार के माध्यम से हैदराबाद गया था। सोमवार को काम के दौरान वह छत से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया और मंगलवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।ठेकेदार और कंपनी ने मृतक के परिजनों को कुल 4 लाख रुपये की सहायता राशि देने की बात कही है, जिसमें 2 लाख रुपये तत्काल नकद दिए गए हैं, जबकि शेष राशि हैदराबाद में दी जाएगी।घटना की सूचना पर जिला परिषद सदस्य सुनीता कुमारी, विधायक प्रतिनिधि लक्ष्मण प्रसाद यादव, उप प्रमुख धर्मेंद्र यादव, मुखिया प्रतिनिधि इस्लाम खान सहित कई गणमान्य लोग पहुंचे और परिजनों को ढांढस बंधाया।ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि स्थानीय स्तर पर रोजगार की ठोस व्यवस्था की जाए, ताकि मजदूरों को मौत के सफर पर न निकलना पड़े.परिजन विशुनधारी कोरवा का कहना था कि उपेन्द्र ही परिवार का एकमात्र सहारा था।अब उसके छोटे बच्चों और बूढ़े माता-पिता का पेट कैसे भरेगा? ताबूत में बंद होकर जब शव आता है, तो रूह कांप जाती है।गांव में काम होता तो बाहर क्यों जाते? कर्मवीर सिंह/10अप्रैल/26