अंतर्राष्ट्रीय
11-Apr-2026


प्रतिनिधिमंडल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान पर ईरान को भी भरोसा नहीं है। पाकिस्तान भले ही अमेरिका के साथ ईरान की शांति वार्ता का केंद्र बनने का दावा कर रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान को पाकिस्तान में हवाई हमले का डर सता रहा था। इसलिए ईरान ने अपने वार्ताकारों की सुरक्षा के लिए कई नकली विमान भेजे इस्लामाबाद भेजे, जिनमें से केवल एक में ही प्रतिनिधिमंडल सवार था। बता दें ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ कर रहे हैं जो हाल ही में ईरानी सरकार में एक प्रमुख व्यक्ति बनकर उभरे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस्लामाबाद जाते समय गालिबफ ने अपने विमान की अगली कतारों को खाली रखा। इन खाली सीटों पर मीनाब स्कूल स्ट्राइक में मारे गए बच्चों और पीड़ितों की तस्वीरें और स्कूल बैग, जूते, कपड़े रखे गए थे। यह हमला हाल ही में ईरान के मीनाब क्षेत्र में हुआ था, जिसे तेहरान अमेरिकी-इजराइली हमला बताता है। इसमें कई स्कूली बच्चियों की जान गई थी। इस विजुअल स्टेटमेंट के जरिए ईरान यह संदेश देना चाहता है कि वह बातचीत की मेज पर केवल एक देश के रूप में नहीं, बल्कि अपने उन निर्दोष नागरिकों के दर्द के साथ जा रहा है जिन्होंने इस युद्ध की कीमत चुकाई है। यह प्रतिनिधिमंडल ऐसे समय में इस्लामाबाद पहुंचा है जब लेबनान में इजराइल के हमलों के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर अनिश्चितता जताई जा रही थी और सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। कुछ खबरों में ईरानी मीडिया के हवाले से कहा गया था कि प्रतिनिधिमंडल तभी वार्ता में हिस्सा लेगा, जब युद्धविराम समझौते में तय शर्तें पूरी होंगी। ईरान एजेंसी ने खबर दी थी कि पहले रखी गई शर्तें पूरी होने तक बातचीत शुरू नहीं होगी। यह बात इस्लामाबाद रवाना होने से पहले गालिबफ द्वारा एक्स पर दिए गए संदेश से भी मेल खाती है। गालिबफ ने कहा था कि दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से तय किए गए दो कदम अभी लागू नहीं हुए हैं। लेबनान में युद्धविराम और वार्ता शुरू होने से पहले ईरान की संपत्तियों पर लगी रोक हटाना। सिराज/ईएमएस 11अप्रैल26