- सिंगल बेंच, डबल बेंच और सुप्रीम कोर्ट से भी याचिका खारिज होने के बावजूद विभाग ने आदेश पालन नही किया, ईई संजीव श्रीवास्तव को कारण बतानें नहीं तो अगली सुनवाई पर पेश होने का आदेश, अगली सुनवाई 12 मई को इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने एक अवमानना याचिका पर सुनवाई दौरान कोर्ट के पूर्व आदेशों की अनदेखी मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग संजीव श्रीवास्तव को चेतावनी दी है कि आदेशों का पालन करने की रिपोर्ट पेश नहीं की तो उन्हें कोर्ट में हाजिर होकर कारण बताना होगा। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश देते कहा कि अफसरों को चार सप्ताह का अंतिम अवसर दिया गया है। याचिका पर अब 12 मई को सुनवाई होगी। अवमानना याचिका लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कर्मचारी गोविंद प्रसाद चौबे ने दायर की थी जो कि उनके वेतनमान और क्रमोन्नति को लेकर पूर्व में दिए कोर्ट आदेशों के पालन को लेकर थी। जिसके खिलाफ विभाग हाइकोर्ट की सिंगल बेंच, डिवीजन बेंच और सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच उसे चुनौती देते याचिकाएं दायर कर चुका था और हाइकोर्ट की सिंगल बेंच, डिवीजन बेंच तथा सुप्रीम कोर्ट ने भी विभाग की याचिका खारिज कर आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद भी विभाग ने कोर्ट आदेश का पालन नहीं करते गोविंद प्रसाद चौबे को पूर्ण लाभ देने में टालमटोल की और उन्हें कुछ लाभ नहीं दिए। जिस पर उनके द्वारा हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की गई जिस पर दोबारा सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने नवंबर 2024 में उन्हें संशोधित तीसरा टाइम स्केल देने के साथ 2 अप्रैल 2018 से बकाया राशि 6 प्रतिशत ब्याज सहित देने के आदेश दिए थे। अपने आदेश में कोर्ट ने कहा था कि तीन महीने में भुगतान नहीं होने पर ब्याज दर 9 प्रतिशत हो जाएगी। इन निर्देशों का भी पालन नहीं हुआ तो याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर कर चीफ इंजीनियर पीएचई विजय सोलंकी और कार्यपालन यंत्री संजीव श्रीवास्तव को पार्टी बनाया। इस पर आठ बार सुनवाई होने के बाद भी जब अफसरों ने हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया तो हाईकोर्ट ने कार्यपालन यंत्री श्रीवास्तव को चार सप्ताह के भीतर आदेश पालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश देते ऐसा नहीं करने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। आनंद पुरोहित/ 12 अप्रैल 2026