-पुराने भुगतान न होने के कारण ही योजना जिले में तोड़ रही दम प्रयागराज,(ईएमएस)। भुगतान की लचर व्यवस्था के कारण मनरेगा पर करीब 47.86 करोड़ की बकाएदारी है। इसमें से करीब 46.86 करोड़ निर्माण सामग्री का बकाया है, जबकि बकाएदारी में तकरीबन एक करोड़ की धनराशि मजदूरी के हिस्से वाली है। यह बकाएदारी आने वाले दिनों में वीबी-जी राम-जी पर भारी पड़ सकती है। बता दें मनरेगा को बंद करके वीबी-जी राम-जी को धरातल पर लाने की तैयारी है। वैसे तो सरकारी सिस्टम इसकी तमाम खूबियां गिना रहा है, लेकिन शासन की उम्मीदों पर खरा उतरना इस योजना के लिए आसान नजर नहीं आ रहा। सबसे बड़ी वजह लंबे समय से चली आ रही करोड़ों की बकाएदारी है। नियमों के अनुरूप 15 दिन के अंदर मजदूरी श्रमिक के बैंक खाते में पहुंच जानी चाहिए, लेकिन कई-कई महीने पेमेंट ही नहीं होते हैं। वहीं निर्माण सामग्री की आपूर्ति तो एक-एक साल तक अटकी रहती है। भुगतान होता भी है तो आधा अधूरा। यही वजह है कि जनपद में मनरेगा पर बकाएदारी बढ़ती गई। इसकी वजह से न तो मजदूर इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं और न ही मैटेरियल आपूर्ति करने में फर्में रुचि ले रहीं हैं। जानकारों का कहना है कि मनरेगा के पुराने भुगतान समय पर न हुए तो इसका असर वीबी-जी राम-जी पर भी देखने को मिलेगा। शंकरगढ़ ब्लाक में 339, धनुपुर में 347, करछना में 317, प्रतापुपर में 301, मेजा में 287 और उरुवा में 272 लाख रुपये का भुगतान बाकी है। श्रृंगवेरपुर में 263 और कौंधियारा में 241 लाख का भुगतान लंबित है। कुछ यही हाल अन्य ब्लाकों का भी है। पुराने भुगतान न होने के कारण ही योजना जिले में दम तोड़ रही है। सिराज/ईएमएस 12अप्रैल26