- कल्याण ग्रामीण सीट: विधायक राजेश मोरे को हाई कोर्ट से राहत, प्रमोद पाटील की याचिका खारिज मुंबई, (ईएमएस)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई से सटे कल्याण (ग्रामीण) विधानसभा सीट से जुड़े चुनाव विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए विधायक राजेश मोरे को राहत दी है। अदालत ने पराजित उम्मीदवार प्रमोद पाटील (राजू पाटील) द्वारा दायर चुनाव याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका 20 नवंबर 2024 को हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी। प्रमोद पाटील ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के डेटा और वीवीपैट (वीवीपैट) स्लिप्स में कथित विसंगतियों का आरोप लगाते हुए पुनर्गणना की मांग की थी। साथ ही उन्होंने राजेश मोरे के चुनाव को रद्द कर खुद को विजयी घोषित करने की अपील भी की थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की एकल पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि केवल विसंगतियों का आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है, जब तक यह न बताया जाए कि इनसे चुनाव परिणाम पर क्या असर पड़ा। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि कथित गड़बड़ियों के कारण विजयी उम्मीदवार के वोट बढ़े, या उन्हें वैध मतों में बहुमत मिल सकता था। अदालत ने पाया कि याचिका में ईवीएम और फॉर्म 17सी से जुड़े विशिष्ट नंबरों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। केवल दस्तावेज संलग्न किए गए, लेकिन ठोस और स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। आरोप सामान्य और अस्पष्ट थे, जो कानूनी मानकों पर खरे नहीं उतरते। हाई कोर्ट ने कहा कि लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 100 और 101 के तहत चुनाव याचिका में ठोस कारण (स्पष्ट आधार) होना जरूरी है। अदालत ने कहा कि जब तक यह स्पष्ट न हो कि कथित विसंगतियों के कारण मतों का गलत स्वीकार हुआ, तब तक केवल ईवीएम या फॉर्म 17सी में अंतर का आरोप पर्याप्त नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने साफ किया कि चुनाव याचिकाओं में कानून की शर्तों का सख्ती से पालन जरूरी है। अस्पष्ट और सामान्य आरोपों के आधार पर किसी चुनाव परिणाम को चुनौती नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर प्रमोद पाटील की याचिका को खारिज कर दिया गया। संजय/संतोष झा-१२ अप्रैल/२०२६/ईएमएस