12-Apr-2026
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-सब कुछ खो दिया’ वाले बयान पर सियासी संग्राम, गहलोत और अखिलेश यादव ने साधा भाजपा पर निशाना नई दिल्ली,(ईएमएस)। राजस्थान की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के एक बयान ने हलचल मचा दी है। मनोहर थाना में आयोजित जनसभा के दौरान उनके सब कुछ खो दिया वाले भावुक बयान के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है और मामला अब पक्ष-विपक्ष के बीच टकराव का कारण बन गया है। दरअसल जनसंपर्क यात्रा के दौरान लोगों की समस्याएं सुनते हुए वसुंधरा राजे ने कहा था कि “मैं तो अपने लिए भी कुछ नहीं कर पाई, मैंने अपना सब कुछ खो दिया, मैं खुद को भी नहीं बचा पाई।” इस बयान के वायरल होते ही सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोगों ने इसे मुख्यमंत्री पद न मिलने के दर्द से जोड़कर देखा। हर बार सीएम तो नहीं बना जा सकता: राठौड़ इस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर बार एक ही व्यक्ति मुख्यमंत्री नहीं बन सकता। उन्होंने एक मारवाड़ी दोहा सुनाते हुए संकेत दिया कि जो मिला है, उसे स्वीकार करना चाहिए और पार्टी नेतृत्व पर सवाल नहीं उठाने चाहिए। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक भाजपा के अंदरूनी संदेश के रूप में देख रहे हैं। राजे सीएम होतीं तो बेहतर काम होते: अखिलेश इस पूरे विवाद में विपक्षी नेताओं ने वसुंधरा राजे का समर्थन किया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अगर राजे मुख्यमंत्री होतीं, तो शायद राज्य में बेहतर काम होता। इस पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सहमति जताई, जिससे भाजपा के भीतर की खींचतान और उजागर होती नजर आई। विवाद बढ़ा तो दी सफाई विवाद बढ़ने पर वसुंधरा राजे ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में पेश किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इशारा धौलपुर स्थित उनके घर से था, जहां नेशनल हाईवे निर्माण के दौरान उन्हें अपनी चारदीवारी पीछे हटानी पड़ी थी। उन्होंने कहा कि नियमों के कारण वह अपना घर भी नहीं बचा सकीं, और उन्होंने उसी उदाहरण के जरिए जनता की समस्याओं को समझाने की कोशिश की थी। राजे ने यह भी कहा कि उनके लिए जनता का प्यार किसी भी पद से बड़ा है और उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करना एक राजनीतिक साजिश है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान समेत देश में भाजपा के अंदरूनी समीकरणों और विपक्ष की रणनीति दोनों को उजागर कर दिया है, जिससे आने वाले समय में राज्य की राजनीति और भी दिलचस्प होने की संभावना है। हिदायत/ईएमएस 12अप्रैल26