12-Apr-2026
...


नई दिल्ली,(ईएमएस)। नई दिल्ली में चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश के स्थानों को नए नाम देने के प्रयास पर भारत ने कड़ा विरोध जताया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऐसे “मनगढ़ंत” और “शरारती” प्रयासों को पूरी तरह खारिज किया जाता है और इससे जमीनी सच्चाई में कोई बदलाव नहीं आएगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि चीन द्वारा भारत के क्षेत्रों को नए नाम देना केवल झूठे दावे और निराधार कथाएं गढ़ने की कोशिश है। उन्होंने दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। भारत ने यह भी कहा कि इस तरह की गतिविधियां दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों को नुकसान पहुंचाती हैं। विदेश मंत्रालय ने चीन को सलाह दी कि वह ऐसे कदमों से बचे, जो द्विपक्षीय रिश्तों में नकारात्मकता पैदा करते हैं। गौरतलब है कि चीन पहले भी इस तरह के कदम उठा चुका है। दिसंबर 2021 में भी उसने अरुणाचल प्रदेश के 21 स्थानों के नाम बदलने का प्रयास किया था, जिसमें तवांग से लेकर अंजॉ जिले तक के कई क्षेत्रों के नाम चीनी, तिब्बती और रोमन भाषा में जारी किए गए थे। उस समय भी भारत ने इस कदम को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि नाम बदलने से वास्तविक स्थिति नहीं बदल सकती। इसी बीच हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल केटी परनाइक ने 9 अप्रैल 2026 को तवांग जिले में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास स्थित खेन्जेमाने क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने वहां तैनात सैनिकों का हौसला बढ़ाया और उन्हें हर परिस्थिति में सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया। अधिकारियों के अनुसार, यह सीमा चौकी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बीच भारत की सतर्कता और संप्रभुता का प्रतीक है। राज्यपाल की यह यात्रा सीमा पर तैनात जवानों के प्रति देश की एकजुटता और समर्थन का संदेश भी मानी जा रही है। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उसकी क्षेत्रीय अखंडता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और ऐसे किसी भी प्रयास का कड़ा जवाब दिया जाएगा। हिदायत/ईएमएस 12अप्रैल26