-जयराम रमेश ने बयानों की टाइमलाइन जारी कर साधा निशाना नई दिल्ली,(ईएमएस)। नई दिल्ली में जाति जनगणना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे को “ठंडे बस्ते में डालने” का आरोप लगाया है। राज्यसभा सांसद और पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया के जरिए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। जयराम रमेश ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार जाति जनगणना को लेकर लगातार अपना रुख बदल रही है और देश को गुमराह कर रही है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में केंद्र द्वारा दिए गए बयानों की एक टाइमलाइन साझा करते हुए दावा किया कि सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है। कांग्रेस नेता के अनुसार, 20 जुलाई 2021 को लोकसभा में सरकार ने स्पष्ट कहा था कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के अलावा अन्य जातियों की गणना नहीं की जाएगी। इसके बाद 21 सितंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में भी केंद्र ने जाति जनगणना न कराने को एक नीतिगत निर्णय बताया था। उन्होंने आगे कहा कि 28 अप्रैल 2024 को एक इंटरव्यू में प्रधानमंत्री मोदी ने जाति जनगणना की मांग को “अर्बन नक्सल मानसिकता” करार दिया था। वहीं, 30 अप्रैल 2025 को सरकार ने अचानक घोषणा की कि आगामी जनगणना में जाति आधारित आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। जयराम रमेश ने यह भी उल्लेख किया कि 30 मार्च 2026 को जनगणना आयुक्त ने कहा था कि डिजिटल प्रक्रिया के कारण 2027 तक अधिकांश आंकड़े उपलब्ध हो जाएंगे। इसके बावजूद अब सरकार द्वारा यह संकेत दिया जा रहा है कि जाति जनगणना के परिणाम आने में कई साल लग सकते हैं, जिसे कांग्रेस ने विरोधाभासी बताया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार संविधान के प्रावधानों में संशोधन कर इस प्रक्रिया को और टालना चाहती है। पार्टी का कहना है कि बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों ने कम समय में जातिगत सर्वेक्षण पूरा कर दिखाया है, ऐसे में केंद्र का तर्क उचित नहीं है। इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस ने सरकार पर “छिपे एजेंडे” के तहत जाति जनगणना से बचने का आरोप लगाया है। जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री जनता को भ्रमित कर रहे हैं और पारदर्शिता से बच रहे हैं। हिदायत/ईएमएस 12अप्रैल26