ज़रा हटके
13-Apr-2026
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लंदन (ईएमएस)। वैज्ञानिकों ने आधुनिक स्कैनिंग तकनीकों के इस्तेमाल से पाया कि करीब 30 करोड़ साल पुराने एक फॉसिल जीव ऑक्टोपस नहीं बल्कि नॉटिलॉइड था, यानी ऐसा समुद्री जीव जिसके पास कठोर खोल होता है। इस खुलासे ने न सिर्फ एक पुरानी वैज्ञानिक मान्यता को खारिज किया है, बल्कि समुद्री जीवों के विकास से जुड़ी पूरी समयरेखा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यह फॉसिल, जिसे पोहलसेपिया मैजोनेन्सिस के नाम से जाना जाता था, साल 2000 में अमेरिका के इलिनोइस राज्य में खोजा गया था। उस समय वैज्ञानिकों को इसमें ऑक्टोपस जैसे कई लक्षण नजर आए थे, जैसे आठ भुजाओं जैसी संरचना, आंखों के निशान और मुलायम शरीर का आकार। इन्हीं विशेषताओं के आधार पर इसे प्राचीन ऑक्टोपस मान लिया गया था। हालांकि, अब नई जांच में यह निष्कर्ष पूरी तरह बदल गया है। वैज्ञानिकों ने इस फॉसिल का अध्ययन माइक्रो-सीटी स्कैन और सिंक्रोट्रॉन एक्स-रे जैसी आधुनिक तकनीकों से किया, जिससे पत्थर के भीतर छिपी संरचनाओं को बिना नुकसान पहुंचाए देखा जा सका। इसी दौरान उन्हें एक महत्वपूर्ण सुराग मिला, जिसे रेडुला कहा जाता है। यह छोटे-छोटे दांतों की एक विशेष संरचना होती है, जो मोलस्क जीवों में पाई जाती है। इस फॉसिल में हर पंक्ति में करीब 11 दांत पाए गए, जबकि ऑक्टोपस में आमतौर पर 7 या 9 दांत होते हैं। इस अंतर ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह जीव ऑक्टोपस नहीं बल्कि नॉटिलॉइड के ज्यादा करीब था। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस जीव की मृत्यु के बाद उसका शरीर कई हफ्तों तक सड़ता रहा, जिससे उसकी संरचना विकृत हो गई। बाद में जब यह मिट्टी में दबकर फॉसिल बना, तो इसका आकार ऑक्टोपस जैसा दिखाई देने लगा और इसी वजह से शुरुआती वैज्ञानिक इसे सही तरीके से पहचान नहीं सके। आगे की जांच में इस फॉसिल की तुलना एक अन्य ज्ञात नॉटिलॉइड पेलियोकैडमस पोहली से की गई, जिसमें दांतों की संरचना काफी समान पाई गई। इस खोज का सबसे बड़ा असर समुद्री जीवों की विकास-समयरेखा पर पड़ा है। पहले माना जाता था कि ऑक्टोपस का विकास बहुत पहले हो चुका था, लेकिन अब यह साफ हो गया है कि उनका विकास बाद में हुआ। प्रमुख वैज्ञानिक थॉमस क्लेमेंट्स के मुताबिक, पत्थर में छिपे छोटे-छोटे दांतों ने एक बड़ी वैज्ञानिक गलती को सुधारने का काम किया है। सुदामा/ईएमएस 13 अप्रैल 2026