ज़रा हटके
12-Apr-2026
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क्या भारत इस बदलाव के लिए तैयार है? बीजिंग (ईएमएस)। मार्च 2026 में जापान ने साफ कि उसकी अर्थव्यवस्था को जिंदा रखने के लिए अब एआई दिमाग वाले रोबोट अनिवार्य हैं। जापान सरकार 2040 तक वैश्विक फिजिकल एआई बाजार में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी चाहती है और इसके लिए उसने करीब 52,500 करोड़ रुपये का फंड जारी किया है। अभी तक हम एआई को सिर्फ स्क्रीन पर देखते थे। लेकिन फिजिकल एआई वह सिस्टम है जो देख सकता है, सीख सकता है और असल दुनिया में काम कर सकता है। ये सिर्फ मशीनें नहीं, बल्कि शरीर वाले निर्णय लेने वाले सिस्टम है। चीन ने ईवी फैक्ट्रियों में 500 से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट तैनात कर दिए हैं। शंघाई ने 10,000 से ज्यादा रोबोट्स को लाइसेंस जारी किया है। चीन के पास आज दुनिया के 70 प्रतिशत एम्बॉडेड एआई मॉडल हैं। वहीं जापान की कामकाजी आबादी तेजी से घट रही है। भारत में स्थिति इसके उलट है। पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे 2025 के अनुसार, भारत में युवा बेरोजगारी दर (15-29 वर्ष) 9.9 प्रतिशत है, जो कुल बेरोजगारी दर (3.1 प्रतिशत) से तीन गुना ज्यादा है। भारत के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उस देश को मशीनों के पीछे भागना चाहिए, जो पहले से ही अपने युवाओं को नौकरियां देने के लिए संघर्ष कर रहा है? भारत पूरी तरह पीछे नहीं है, लेकिन यहां प्रयास बिखरे हुए हैं। जैसे खेती कि एक्समशीन जैसे स्टार्टअप्स तेलंगाना और कर्नाटक में इसतरह रोबोट्स का परीक्षण कर रहे हैं जो फसल की निगरानी कर सकते हैं और पैदावार दोगुनी कर सकते हैं। जहां चीन-जापान अरबों डॉलर खर्च कर रहे हैं, वहीं भारत के रोबोटिक्स इकोसिस्टम को अब तक मात्र 100 मिलियन डालर का निवेश मिला है। जापान और चीन के लिए रोबोट रिप्लेसमेंट (इंसान की जगह) हैं, लेकिन भारत के लिए इन्हें ऑग्मेंटेशन (इंसान की ताकत बढ़ाने वाला) होना होगा। भारत को ऐसी तकनीक चाहिए जो उत्पादकता बढ़ाए, लेकिन रोजगार के रास्ते बंद न करे। आशीष/ईएमएस 12 अप्रैल 2026