नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नौकरी के बहाने दस्तावेजों का दुरुपयोग करने वाले साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पकड़ा गया एक आरोपी इरशाद मलिक आरबीएल बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर तैनात था। आरोपी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को सुरक्षित ठिकाने लगाने के लिए किया जा रहा था। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मनमोहन सिंह ने कभी दिल्ली का दौरा ही नहीं किया था। उसने नौकरी पाने के लिए हरजिंदर उर्फ सनी को अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो दिए थे। गिरोह ने इन दस्तावेजों का दुरुपयोग कर और फर्जी ओटीपी प्राप्त कर मनमोहन के नाम पर जाली चालू खाता खोल लिया। इस मामले में पुलिस पहले ही चार हरजिंदर उर्फ सनी, कुलविंदर सिंह, हरजी सिंह और हिमांशु कपूर को गिरफ्तार कर चुकी थी, लेकिन बैंक के भीतर मौजूद उनके सहयोगी तक पहुंचना बाकी था। तकनीकी निगरानी और खुफिया सूचनाओं के आधार पर क्राइम ब्रांच को पता चला कि आरोपी बैंक कर्मी इरशाद मलिक न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी स्थित आरबीएल बैंक की शाखा में आने वाला है। पुलिस ने जाल बिछाकर उसे हिरासत में ले लिया। शुरुआत में आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब उसे द्वारका स्थित कार्यालय ले जाकर गहन पूछताछ की गई, तो उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। पूछताछ में इरशाद ने गिरोह के काम करने के तरीके का खुलासा किया। आरोपी ने बताया कि यह गिरोह फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पार्ट-टाइम जॉब के लुभावने विज्ञापन देता था। पीड़ितों को टेलीग्राम ग्रुप्स में जोड़कर छोटे-छोटे टास्क दिए जाते थे और विश्वास जीतने के लिए शुरुआत में उनके खाते में छोटी रकम जमा की जाती थी। एक बार भरोसा कायम होने के बाद, पीड़ितों को इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने या बड़े निवेश के नाम पर लाखों रुपये ट्रांसफर करने के लिए उकसाया जाता था। जैसे ही बड़ी राशि फर्जी खाते में जमा होती, आरोपी पीड़ितों को ब्लॉक कर देते, टेलीग्राम ग्रुप डिलीट कर देते और अपनी वेबसाइटें बंद कर देते थे। अजीत झा /देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/13/अप्रैल /2026