कोरबा (ईएमएस)। सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम कोल् इंडिया की अनुसांगिक कंपनी एसईसीएल बिलासपुर के अधीन कोरबा-पश्चिम क्षेत्र में स्थापित एवं संचालित खुले मुहाने की गेवरा कोयला परियोजना अंतर्गत एसईसीएल की मेगा परियोजना अंतर्गत आने वाले ग्राम नराईबोध के ग्रामीणों ने पुनर्वास, बसाहट और रोजगार जैसी मूलभूत मांगों को लेकर ग्राम पंचायत के नेतृत्व में अलसुबह 7:00 बजे से ग्रामीणों ने भठोरा फेस खदान बंद कर दी। आंदोलन के कारण खदान में कामकाज पूरी तरह ठप्प हो गया। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में जिला प्रशासन, एसईसीएल प्रबंधन और ग्राम नराईबोध के बीच हुई त्रिपक्षीय बैठक में कई अहम समझौतों पर सहमति बनी थी लेकिन आज तक उन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया गया है। आंदोलनकारियों की मुख्य मांगो के अंतर्गत प्रभावित ग्रामीणों को उचित बसाहट स्थल और वहां नागरिक सुविधाएं प्रदान करना, पूर्व में छूटे हुए मकानों की जीपीएस के माध्यम से पारदर्शी नापना, उचित मुआवजा, समझौते के अनुसार आउटसोर्सिंग कंपनी में 70% स्थानीय प्रभावित ग्रामीणों को प्राथमिकता के साथ रोजगार, बसाहट स्थल पर लंबित विकास कार्यों को तत्काल शुरू करना इत्यादि हैं। ग्राम पंचायत नराईबोध के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल सांकेतिक विरोध नहीं है। यदि प्रबंधन और प्रशासन तत्काल ठोस निर्णय नहीं लेते हैं, तो 15 अप्रैल से खदान के समीप ही विशाल पंडाल लगाकर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा। पार्षद अमिला राकेश पटेल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रबंधन ने बार-बार केवल आश्वासन दिया है, धरातल पर कोई काम नहीं हुआ जब तक हमारी मांगों पर सार्थक कार्यवाही नहीं होती यह आंदोलन जारी रहेगा। किसी भी अप्रिय स्थिति की पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी। - 13 अप्रैल / मित्तल