क्षेत्रीय
13-Apr-2026
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बिलासपुर (ईएमएस)। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी रतनपुर के सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने तथा इसके गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम, सम्मान समारोह एवं जन-जागृति अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह आयोजन पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति तथा प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी, बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में सिद्ध विनायक परिसर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छत्तीसगढ़ की प्राचीन और लगभग विलुप्त हो रही लोक नाट्य शैली रतनपुरिहा गम्मत रही, जिसे स्थानीय कलाकारों ने प्रस्तुत कर हास्य-व्यंग्य एवं पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीतों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस प्रस्तुति का उद्देश्य नई पीढ़ी को उस दौर से जोडऩा था, जब गम्मत सामाजिक संदेश और मनोरंजन का सशक्त माध्यम हुआ करती थी।समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना से हुआ। मुख्य अतिथि थावे विद्यापीठ गोपालगंज के कुलपति डॉ. विनय कुमार पाठक ने अपने उद्बोधन में कहा कि गम्मत में सिर्फ मनोरंजन नहीं, वरन पुरखों की थाती और माटी की महक है। उन्होंने इस आयोजन को अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक विनम्र प्रयास बताया। मंच पर महामंडलेश्वर पं. दिव्यकांत शर्मा, डॉ. राघवेन्द्र दुबे, मनोहर चंदेल, कार्यक्रम अध्यक्ष लवकुश कश्यप और डॉ. विवेक तिवारी जैसे गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा देने वाले 23 विभूतियों को प्रशस्ति पत्र एवं छत्तीसगढ़ गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में साहित्य एवं संस्कृति, कला एवं संगीत, तथा शिक्षा एवं समाज सेवा के प्रमुख नाम शामिल थे। कार्यक्रम संयोजक शीतल प्रसाद पाटनवार ने रतनपुर की गरिमा को पुनर्जीवित करने हेतु शासन-प्रशासन के समक्ष भव्य हरित प्रवेश द्वार का निर्माण, दुलहरा जैसे ऐतिहासिक तालाबों का संरक्षण, पुरातात्विक धरोहरों की रक्षा, व्यापक वृक्षारोपण से हरित रतनपुर और प्लास्टिक मुक्त अभियान जैसी प्रमुख मांगें और संकल्प रखे। अंत में, उपस्थित जनों ने जल संरक्षण और संस्कृति संवर्धन की सामूहिक शपथ ली। इस सफल आयोजन ने रतनपुर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को एक नया गौरव प्रदान किया है। मनोज राज 13 अप्रैल 2026