लंदन (ईएमएस)। वर्तमान समय में करियर की दौड़, नौकरी की अनिश्चितता, रिश्तों की उलझनें, भविष्य की चिंताएं और भागदौड़ भरी ज़िंदगी हमारी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही हैं। सुबह उठने से लेकर रात में सोने तक हम किसी न किसी मानसिक उलझन में घिरे रहते हैं। यह अत्यधिक मानसिक दबाव न केवल हमारी मानसिक, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है, जो अंततः कई जानलेवा बीमारियों का मार्ग प्रशस्त करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव में रहने से शरीर का हार्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है। कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर असामान्य रूप से बढ़ने लगता है, जो शरीर को अलर्ट मोड में रखता है। यह स्थिति धीरे-धीरे दिल से लेकर पाचन तक, शरीर के हर अंग को प्रभावित करती है और गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। सबसे पहले बात करें दिल की बीमारियों की। ताजा रिपोर्ट बताती है कि इन स्ट्रेस हार्मोन्स के बढ़ने से दिल तेज़ी से धड़कता है और रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) बढ़ जाता है। लंबे समय तक ऐसा रहने से धमनियां सख्त हो सकती हैं, रक्त प्रवाह बाधित होता है, और हार्ट अटैक, स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है। तनाव का सीधा और गहरा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है। मानसिक दबाव के कारण मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर्स का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे व्यक्ति को लगातार चिंता, डर, घबराहट और उदासी महसूस होती है। यह स्थिति अंततः गंभीर डिप्रेशन और एंजायटी डिसऑर्डर में बदल सकती है, जिससे आत्मविश्वास में कमी आती है और सामाजिक अलगाव महसूस होता है। पाचन तंत्र भी तनाव से अछूता नहीं है। तनाव की स्थिति में शरीर का ध्यान पाचन से हटकर सर्वाइवल मोड पर चला जाता है, जिससे पाचन धीमा हो जाता है। इसके परिणामस्वरूप गैस, एसिडिटी, पेट दर्द, और कब्ज जैसी समस्याएं होती हैं, जो बढ़कर इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (आईबीएस) का रूप ले सकती हैं। नींद की समस्या यानी अनिद्रा भी तनाव की एक बड़ी देन है। जब दिमाग लगातार चिंताओं में उलझा रहता है, तो उसे पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इससे व्यक्ति को सोने में कठिनाई होती है, या बार-बार नींद खुल जाती है। नींद की कमी से दिनभर थकान, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन बना रहता है, जो अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है। वजन बढ़ना और कमजोर इम्यूनिटी भी तनाव से जुड़ी हैं। कोर्टिसोल हार्मोन भूख बढ़ाता है, जिससे अक्सर लोग ज़्यादा और अस्वास्थ्यकर भोजन करने लगते हैं, और उनका वज़न तेज़ी से बढ़ने लगता है। इसके साथ ही, तनाव हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) को भी कमज़ोर करता है, जिससे शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता घट जाती है और व्यक्ति बार-बार बीमार पड़ता है। हालांकि तनाव को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है, लेकिन इसे नियंत्रित करना संभव है। इसके लिए जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव अत्यंत आवश्यक हैं। रोज़ाना योग और प्राणायाम, पर्याप्त और गहरी नींद, संतुलित आहार और नियमित व्यायाम शरीर और मन को मज़बूत बनाते हैं। दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताना, अपनी भावनाओं को व्यक्त करना, और ज़रूरत पड़ने पर सोशल मीडिया से दूरी बनाना भी सहायक होता है। ध्यान (मेडिटेशन) और रिलैक्सेशन तकनीकें मानसिक शांति प्रदान करती हैं। सुदामा/ईएमएस 14 अप्रैल 2026