-भारत को पीएलसी में 51फीसदी नियंत्रक की हिस्सेदारी देकर अहसान चुका रहा श्रीलंका नई दिल्ली,(ईएमएस)। होर्मुज संकट में जब चीन ने ईरान के साथ दोस्ती का ढोंग रचा और श्रीलंका से दगा किया तब भारत ने श्रीलंका का हाथ थाम लिया। ईंधन की कमी, आर्थिक दबाव और ऊर्जा संकट से जूझ रहे श्रीलंका को भारत ने आपातकालीन मदद पहुंचाई। अब श्रीलंका इस अहसान का बदला चुकाने जा रहा है। भारत की प्रमुख रक्षा शिपयार्ड मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने श्रीलंका के सबसे बड़े शिपयार्ड कोलंबो डॉकयार्ड पीएलसी में 51 फीसदी नियंत्रक हिस्सेदारी हासिल कर ली है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह सौदा एमडीएल का पहली अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण है, जिसकी कीमत 26.8 मिलियन डॉलर यानी करीब 249.5 करोड़ रुपए है। मुंबई स्थित इस डिफेंस पीएसयू ने 9 अप्रैल को जारी बयान में कहा था कि इस डील से श्रीलंका का सबसे बड़ा शिपयार्ड अब उसके परिचालन नियंत्रण में आ गया है। यह सौदा जापान की ओनोमिची डॉकयार्ड से शेयर खरीदकर पूरा हुआ है। यह अधिग्रहण सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि जियो पॉलिटिक्स के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। चीन श्रीलंका में हम्बनटोटा बंदरगाह पर 99 साल का पट्टा ले चुका है और कोलंबो में नियमित रूप से अपने नौसैनिक जहाज खड़े कर रहा है। भारतीय हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती पैठ को देखते हुए दिल्ली इस अधिग्रहण को अपने समुद्री विस्तार रणनीति का हिस्सा बता रही है। रिपोर्ट के मुताबिक एमडीएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (रिटायर्ड) कैप्टन जगमोहन ने कहा कि एमडीएल द्वारा सीडीपीएलसी का अधिग्रहण हमारे दोनों संगठनों के लिए ही नहीं, बल्कि भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सहयोग के लिए मील का पत्थर है। ईरान की अमेरिका-इजराइल से जंग के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। श्रीलंका जैसे छोटे देश ईंधन संकट, महंगाई और आर्थिक दबाव से जूझ रहे थे, जबकि चीन ने ईरान के साथ संबंधों का दावा किया, लेकिन व्यावहारिक रूप से श्रीलंका को तत्काल राहत नहीं दी। इसके उलट भारत ने श्रीलंका को डीजल और अन्य ईंधन की इमर्जेंसी सप्लाई की। पड़ोसी पहले सिद्धांत के तहत नई दिल्ली ने श्रीलंका का साथ दिया, जिससे कोलंबो में आर्थिक स्थिरता बनी रही। अब यह अधिग्रहण उस सहायता का प्रत्युत्तर माना जा रहा है। यह डील भारत की समुद्री अमृत काल विज़न 2047 के अनुरूप है, जिसके तहत देश को वैश्विक समुद्री शक्ति बनाने का लक्ष्य है। एमडीएल जैसी कंपनियां अब विदेशों में पैर पसार रही हैं, जिससे भारतीय जहाज निर्माण और रिपेयर क्षमता बढ़ेगी। विश्लेषकों का मानना है कि मुख्य शिपिंग रूट्स पर कोलंबो डॉकयार्ड की रणनीतिक स्थिति भारत को हिंद महासागर में मजबूत पकड़ देगी और चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति को प्रभावी चुनौती मिलेगी। श्रीलंका के लिए भी यह फायदेमंद साबित होगा। सिराज/ईएमएस 14 अप्रैल 2026