नई दिल्ली,(ईएमएस)। पूरी दुनिया में जब भी जहां भी शांति और सुरक्षा की बात आती है, तब भारतीय सैनिकों का नाम सबसे ऊपर आता है। अपनी बहादुरी और अनुशासन के दम पर भारतीय सेना न केवल देश की सरहदों की रक्षा कर रही है, बल्कि सात समंदर पार भी अशांत इलाकों में शांति का झंडा बुलंद कर रही है। खतरनाक जंग के मैदान हों या गृहयुद्ध से जूझते देश, भारतीय सैनिक हर जगह अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं। बात दें कि भारत की विदेश नीति हमेशा से वैश्विक शांति की समर्थक रही है। इसकारण संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के शांति मिशनों में भारत सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले देशों में शामिल है। भारतीय सैनिक उन इलाकों में तैनात होते हैं, जहां हिंसा चरम पर होती है या दो देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति बनी रहती है। इन मिशनों का मुख्य उद्देश्य युद्धविराम को लागू करना, स्थानीय नागरिकों को उग्रवादियों से बचाना और संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में फिर से जीवन को सामान्य बनाना है। लेबनान में वर्तमान में इजरायल लोगों को निशाना बना रहा है। इस समय में वहां पर भारतीय सैनिकों की भूमिका बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील है। यहां इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच लगातार तनाव बना रहता है। यूएन मिशन (यूएनआईएफआईएल) के तहत भारत ने यहां लगभग 600 सैनिकों की एक बड़ी टुकड़ी तैनात की है। इन सैनिकों का काम सीमा पर होने वाली किसी भी घुसपैठ या हमले को रोकना और दोनों पक्षों के बीच बफर जोन के तौर पर काम करना है। लेबनान की पहाड़ियों में तैनात ये जांबाज अपनी जान जोखिम में डालकर मध्य पूर्व में एक बड़े युद्ध को टालने में मदद कर रहे हैं। वहीं अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) पिछले कई दशकों से आंतरिक संघर्ष और विद्रोही समूहों की हिंसा से जूझ रहा है। साल 2005 से ही भारतीय सैनिक शांति मिशन का हिस्सा हैं। कांगो के घने जंगलों और दुर्गम इलाकों में विद्रोही समूह अक्सर गांवों पर हमला करते हैं। भारतीय बटालियन यहां न केवल इन विद्रोहियों को पीछे धकेलती है, बल्कि वहां की सरकार को स्थिरता बनाए रखने में भी मदद करती है। यहां भारतीय सैनिकों के अनुशासन और उनके मानवीय कार्यों की स्थानीय स्तर पर काफी प्रशंसा होती है। वहीं दक्षिण सूडान दुनिया के सबसे नए देशों में से एक है, लेकिन यह लंबे समय से जातीय संघर्ष और गृहयुद्ध की चपेट में रहा है। संयुक्त राष्ट्र के मिशन के तहत भारतीय सैनिक यहां तैनात हैं। इनका प्राथमिक लक्ष्य निर्दोष नागरिकों की जान बचाना और राहत सामग्री पहुंचाने वाले रास्तों को सुरक्षित रखना है। आपसी संघर्ष के कारण यहां लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। दक्षिण सूडान में भारतीय डॉक्टरों और इंजीनियरों वाली सैन्य इकाइयां भी बुनियादी सुविधाएं बहाल करने में जुटी हैं। सीरिया और इजरायल के बीच विवादित क्षेत्र गोलन हाइट्स सामरिक दृष्टि से दुनिया के सबसे गर्म इलाकों में से एक है। यहां शांति बनाए रखने के लिए तैनात यूएन फोर्स में भारतीय सैनिक शामिल हैं। इनका मुख्य काम दोनों देशों के बीच हुए समझौते का पालन करना और लॉजिस्टिक्स सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह क्षेत्र इतना संवेदनशील है कि यहां छोटी सी चूक भी अंतरराष्ट्रीय संकट पैदा कर सकती है। भारतीय सैनिक अपनी सूझबूझ और सतर्कता से यहां पिछले कई वर्षों से स्थिति को नियंत्रण में रखे हुए हैं। शांति मिशनों के अलावा भारत ने आर्मेनिया जैसे देशों के साथ अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करने के लिए वहां डिफेंस अताशे यानी रक्षा अधिकारी तैनात किए हैं। आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच बढ़ते तनाव और भारत के साथ रक्षा सौदों के चलते यह तैनाती बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा तंजानिया, मोजांबिक, आइवरी कोस्ट, इथोपिया और फिलीपींस जैसे देशों में भी भारत की सैन्य मौजूदगी अलग-अलग रूपों में है। फिलीपींस के साथ ब्रह्मोस मिसाइल जैसे रक्षा समझौतों ने वहां भारतीय विशेषज्ञों की भूमिका को और बढ़ा दिया है। आशीष/ईएमएस 14 अप्रैल 2026