बिलासपुर (ईएमएस)। भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर एवं महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर फूले-अम्बेडकर महिला सशक्तिकरण एवं प्रतिभा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में दलगत राजनीति से ऊपर उठकर महिला जनप्रतिनिधियों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाली कई महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारत की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्रीबाई फुले और डॉ. भीमराव अम्बेडकर के शिक्षा, समानता और सशक्तिकरण संबंधी विचारों को महिलाओं, बच्चों और समाज तक पहुंचाना था। कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षा, आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय की ज्योति फैलाने का संकल्प लिया गया। समारोह में विद्यालयीन बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। चित्रकला प्रतियोगिता -19 बच्चों ने भाग लिया। अम्बेडकर, फुले, सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शाहू महाराज आदि महापुरुषों के चित्र ्र-4 साइज पेपर पर बनाए गए। निबंध प्रतियोगिता-15 बच्चों ने भाग लिया, जिसमें 5 बच्चों ने अंग्रेजी में निबंध लिखा। वेशभूषा प्रतियोगिता-बच्चों ने सावित्रीबाई फुले, डॉ. अम्बेडकर आदि की वेशभूषा में प्रस्तुति दी। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को प्रशस्ति पत्र व मोमेंटो प्रदान किए गए। विशेष रूप से 95त्न या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले बच्चों (जैसे सैम सिंह डहरिया 96.3त्न, श्रद्धा प्रधान 99.2त्न, रश्मि मनहर 96.3त्न) को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पामगढ़ विधायक श्रीमती शेष राज हरवंश, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सत्यलता मिरी, जिला पंचायत सदस्य श्रीमती अरुणा सूर्या, श्रीमती सतकली बावरे, सुश्री प्रीति बान्धेकर सुनीता राज, कवर मैडम सहित कई महिला जनप्रतिनिधियों को माता सावित्री फूले महिला सशक्तिकरण सम्मान प्रदान किया गया। विधायक शेष राज हरवंश ने कहा: सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं के भीतर कुछ करने की चिंगारी फूंकी, जिसके कारण आज महिलाएं हर क्षेत्र में निर्भीक होकर कार्य कर रही हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष सत्यलता मिरी ने महिलाओं को आगे आने का आह्वान किया। सुश्री प्रीति बान्धेकर ने अंधविश्वास और दकियानूसी परंपराओं से ऊपर उठकर प्रतिभा दिखाने की बात कही। डॉ. लक्ष्मण कुमार भारती ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने गोबर सहकर भी शिक्षा का अलख जगाया, अन्यथा आज भी महिलाएं गोबर थाप रही होतीं। समारोह में ज्ञान सूर्य तू इस जगत केज् को जिजीविषा और स्वतंत्रता को बल देता भारत का संविधान हैज्को सरजू रत्नाकर द्वारा भावपूर्ण गीतों की मधुर प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्होंने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण रहा नि:शुल्क कोचिंग के लिए नियमित मासिक सहयोग करने वाले लगभग 200 दानदाताओं को विशेष सम्मान। इनके योगदान से गरीब प्रतिभावान बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का मौका मिल रहा है। कार्यक्रम का सफल संचालन जिजीविषा पाटले ने किया। मनोज राज 14 अप्रैल 2026