राज्य
15-Apr-2026


नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि जिन विचाराधीन कैदियों ने अपनी संभावित अधिकतम सजा का एक-तिहाई या आधा हिस्सा जेल में काट लिया है उन्हें रिहा किया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए यह निर्देश दिया। अदालत ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी भी जताई। अदालत ने कहा कि पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट भ्रामक थी। अदालत ने जिला न्यायाधीशों और जेल अधिकारियों को इन नियमों का सख्ती से पालन करने का आदेश दिया है ताकि कैदियों को समय पर कानूनी राहत मिल सके। दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने का आदेश देते हुए कहा कि जिन विचाराधीन कैदियों ने संभावित अधिकतम सजा का एक-तिहाई या आधा हिस्सा पूरा कर लिया है, उन्हें राहत दी जानी चाहिए। यह निर्देश धोखाधड़ी एवं प्रतिरूपण के मामले में आरोपी को जमानत देते हुए दिया। अदालत ने आदेश की प्रति जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, जेल महानिदेशक, दिल्ली हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति एवं दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश भी दिए हैं। मामले में आरोपी पर खुद की गलत पहचान बताकर शिकायतकर्ता और उसकी बेटी से धोखाधड़ी करने का आरोप था। अभियोजन पक्ष ने व्हाट्सऐप चैट, ऑडियो रिकॉर्डिंग एवं बैंक दस्तावेजों के आधार पर आरोपों को साबित करने की कोशिश की। हालांकि अदालत ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि पुलिस की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट भ्रामक है क्योंकि उसमें जिन ऑडियो रिकॉर्डिंग का उल्लेख किया गया, वे वास्तव में सह-आरोपी से संबंधित थीं न कि मौजूदा आरोपी से। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/15/ अप्रैल /2026