राष्ट्रीय
15-Apr-2026
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:: स्टेट प्रेस क्लब की समूह चर्चा में प्रबुद्ध महिलाओं ने रखे विचार, कहा- सृजन की क्षमता ही बेहतर नेतृत्व का आधार :: इंदौर (ईएमएस)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होना न केवल आधी आबादी के लिए, बल्कि संपूर्ण समाज के लिए युगांतकारी परिवर्तन लाने वाला कदम साबित होगा। यह विचार स्टेट प्रेस क्लब, म.प्र. द्वारा राजनीति में नया सवेरा विषय पर आयोजित समूह चर्चा में उभरकर आए। अभिनव कला समाज सभागार में आयोजित इस विमर्श में वक्ताओं ने लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को जल्द अवसर देने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल को ऐतिहासिक बताते हुए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. स्वाति तिवारी ने कहा कि जब महिलाएं देश-दुनिया के हर क्षेत्र में आगे हैं, तो राजनीति में पीछे क्यों रहें? प्रकृति ने जिसे सृजन की क्षमता दी है, उससे बेहतर समाज और देश कोई और नहीं चला सकता। महिलाओं में दूरदर्शिता के साथ-साथ परिस्थितियों को संभालने की अनूठी दृष्टि होती है। उन्होंने कहा कि काल करे सो आज कर की तर्ज पर प्रधानमंत्री ने यह बड़ा फैसला लेकर महिला समाज को गौरवान्वित किया है। इस फैसले से केवल राजनीतिक दलों को ही नहीं, बल्कि संपूर्ण महिला समाज को लाभ मिलेगा। :: सिर्फ कुर्सी नहीं, योग्यता और आत्मविश्वास है असली ताकत :: चिकित्सक डॉ. विनीता कोठारी ने आत्मविश्वास पर जोर देते हुए कहा कि सिर्फ कुर्सी मिलने से ताकत नहीं मिलती, बल्कि स्वयं में योग्यता और आत्मविश्वास पैदा करके ही हम समाज में बराबरी से खड़े हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि राजनीति में सफल होने के लिए महिलाओं को हर क्षेत्र का गहन अध्ययन करना होगा। चर्चा में डॉ. अरविंदर कौर सबरवाल ने महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि आरक्षण का लाभ कुछ चुनिंदा परिवारों तक सीमित रहने के बजाय योग्य और जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं तक पहुंचना चाहिए। जो महिलाएं राजनीति में आना चाहती हैं, उन्हें बेहतर शिक्षण-प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि वे समाज में सक्षमता के साथ खड़ी हो सकें। :: संसद में बढ़ेगा मातृशक्ति का गौरव :: क्षत्रिय मराठा महिला संगठन की स्वाति युवराज काशिद ने कहा कि वर्तमान में संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 14 प्रतिशत है, जो अब बढ़कर 33 प्रतिशत हो जाएगा। जब देश का नेतृत्व महिला राष्ट्रपति और सैन्य अभियानों का संचालन महिला अधिकारी कर सकती हैं, तो राजनीति में भी महिलाएं अपनी शक्ति का लोहा मनवाएंगी। विहिप की ज्योति श्रीवास्तव ने कहा कि मातृशक्ति में ही राष्ट्रशक्ति समाहित है। उन्होंने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि चयन प्रक्रिया में चरित्रवान व्यक्तित्व को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने इस अधिनियम को जन-समर्थन देने के लिए जारी मिस्ड कॉल नंबर की भी जानकारी साझा की। :: नीति निर्धारण में महिलाएं निभाएंगी मुख्य भूमिका :: अधिवक्ता भावना साहू और स्वाति मेहता ने कहा कि वर्षों के भेदभाव के बाद अब वह समय आ गया है जब महिलाएं देश के विकास और नीति निर्धारण में अपनी स्वतंत्र भूमिका निभाएंगी। कार्यक्रम को वरिष्ठ पत्रकार रचना जौहरी, शीतल राय, डॉ. सुनीता श्रीवास्तव सहित पूनम मिमरोट और शिवानी अड़सपुरकर ने भी संबोधित किया। वक्ताओं का मानना था कि इस फैसले से महिलाओं को देश के हित में बड़े निर्णय लेने की आजादी मिलेगी। हमें मिलकर ऐसा माहौल तैयार करना होगा जिसमें महिलाओं को इस क्षेत्र में आने पर गौरव महसूस हो। प्रारंभ में स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने वर्ष 1975 से लेकर अब तक महिला आरक्षण के लिए उठाए गए कदमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार की मंशा 2011 की जनगणना और परिसीमन के आधार पर वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से 33 प्रतिशत सीटों का आरक्षण लागू करने की है। कार्यक्रम का संचालन पंकज क्षीरसागर ने किया और आभार वूमंस प्रेस क्लब की अध्यक्ष शीतल राय ने माना। प्रकाश/15 अप्रैल 2026