राज्य
16-Apr-2026
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::पारिवारिक विवादों में मध्यस्थता से हो रहे निराकरण में कोरी/कोली समाज की अग्रणी भूमिका सराहनीय - डाॅ. शमीम:: इन्दौर (ईएमएस)आज के आधुनिक युग में पति-पत्नि के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर होने वाली कहासुनी नासमझी के कारण विवाद का कारण बन जाति है, और नौबत सम्बंध विच्छेद तक पहुंच जाती है, ऐसे में पुलिस और न्यायालय तक मामला पहुंच जाता है, जिसमें समय और पैसा बर्बाद होता है, ऐसे में न्यायालय का भार कम करने के उद्देश्य से इन्दौर में न्यायालीन प्रशिक्षण के माध्यम से मध्यस्थता केन्द्रों की स्थापना की गई। इन मध्यस्थता केन्द्रों के माध्यम से समझौते से समाधान के तहत 80 प्रतिशत प्रकरणों का निराकरण सामाजिक स्तर पर ही हो रहा है, इसमें हम गर्व से कह सकते हैं, कि सबसे अग्रणी भूमिका में कोरी/कोली समाज है। उक्त विचार ट्रेनर मास्टर एवं सेवानिवृत्त मजिस्ट्रेट डाॅ. मोहम्मद शमीम ने कोरी/कोली समाज महापंचायत द्वारा समाज के चार पारिवारिक प्रकरणों के लिए आयोजित पंचायत में व्यक्त किए। इस दौरान विधिक सहायता केन्द्र प्रभारी दीपक शर्मा, प्रमुख रीडर कैलाश बारिया ने स्वयं उपस्थित होकर चार प्रकरणों की सुनवाई का न केवल निरक्षण किया, बल्कि चारों प्रकरणों में पति-पत्नि को समझाइश दी। और महापंचायत के पंचों द्वारा की जा रही प्रकरणों की सुनवाई प्रक्रिया की भूरि-भूरि प्रशंसा भी की। पंचायत में पंचों ने चार प्रकरणों की सुनवाई की जिसमें सास-बहु और पति-पत्नि विवाद में पत्नि द्वारा रात दिन फोन पर चर्चा करने, तथा बिना बताए मायके चले जाना और गाली-गलोच के साथ बातचीत करने का मामला सामने आया, इस पर पंचों ने दोनों पति-पत्नी को भविष्य संवारने और बच्चों के भविष्य को लेकर समझाइश देते हुए एक माह का समय देते हुए अपनी आदतों में सुधार लाने पर जोर देते हुए एक माह बाद पुनः सुनवाई करने का कहा। दूसरे प्रकरण में चार साल के प्रेम-प्रसंग के चलते लव मैरेज होने के एक साल के भीतर ही आपसी विवाद के चलते दोनों पति-पत्नी द्वारा तलाक लेने की जिद्द पर अड़े पति-पत्नि, जो कि अपने माता-पिता को भी नहीं लाने पर सलाह दी गई कि माता-पिता की अनुपस्थिति के बिना हम कोई फैसला नहीं ले सकते हैं, माता-पिता के सामने ही हम कोई फैसला ले सकते हैं, आपका तलाक कराने का अधिकार महापंचायत को नहीं है, इसलिए न्यायालय की शरण लेने का कहा गया। तीसरे पैचिदा प्रकरण में पत्नि द्वारा हिन्दू धर्म के सिद्धांत को न मानते हुए घर में पूजा-पाठ आदि से दूरी बनाने तथा क्रिश्चियन धर्म अपनाने का मामला सामने आया, इसमें गौर करने वाली बात यह है कि इस दम्पति के 17-18 साल के दो बच्चे होने तथा पति द्वारा घर का सम्पूर्ण खर्च उठाने के बावजूद पति-पत्नि के गृहस्थ जीवन में नहीं रहने के कारण तलाक लेने का मामले पर पंचों ने सलाह दी कि शादी के पहले आपने चाहे किसी भी धर्म विशेष के अनुसार अपना जीवन यापन किया, इससे कोई सरोकार नहीं है, शादी के बाद पत्नि का धर्म भी‌ बदल जाता है, आपको पति और उनके परिवार के अनुसार घर में पूजा-पाठ करना दायित्व बनता है, आपको सलाह दी जाती है, कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए अपना आचरण सुधारना चाहिए तथा पति व परिवार के साथ घर के देवी-देवता का पूजन करना चाहिए तथा धर्म परिवर्तन का विचार मन से त्याग कर अपनी परिवार की देखभाल करें, इस पर पत्नि ने अपनी ग़लती सुधारने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर मिडिएटर हेमराज वाडिया, कैलाश चंद्र चौधरी, प्रकाश महावर कोली, हेमराज वर्मा, ईश्वरलाल सनोटिया, अशोक वर्मा, ओमप्रकाश धीमान, देवीप्रसाद वर्मा, महेश वर्मा, रमेश चिरगैया, मोतीलाल धीमान, नवीन चौधरी, रत्नेश वर्मा, आदि की सराहनीय भूमिका रही। आनंद पुरोहित/ 16 अप्रैल 2026