अंतर्राष्ट्रीय
17-Apr-2026


-संसद में विरोध के बाद इंडोनेशिया ने बदला रुख जकार्ता,(ईएमएस)। अमेरिका और इंडोनेशिया के बीच प्रस्तावित रक्षा समझौता एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद विवादों में घिर गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस डील के तहत अमेरिकी सैन्य विमानों को इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में व्यापक छूट दी जाने वाली थी, जिससे क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता था। इस खुलासे के बाद इंडोनेशिया में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। सांसदों और विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाया कि किसी विदेशी सेना को देश के एयरस्पेस में इतनी बड़ी छूट कैसे दी जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह का कोई भी निर्णय संसद की मंजूरी के बिना स्वीकार्य नहीं होगा। विवाद बढ़ने पर इंडोनेशिया सरकार को सफाई देनी पड़ी। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि जो आधिकारिक समझौता हुआ है, उसमें अमेरिकी विमानों को विशेष ओवरफ्लाइट एक्सेस देने का कोई प्रावधान शामिल नहीं है। यानी, मूल डील तो बरकरार है, लेकिन उसका सबसे विवादास्पद हिस्सा हटा दिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रस्तावित व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ मलक्का पर नजर रखना था, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है, जिससे इसकी रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है। बताया जा रहा है कि इस योजना पर चर्चा पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबैन्तो के बीच हुई थी। हालांकि, औपचारिक रूप देने से पहले ही इस योजना के लीक होने से पूरा समीकरण बदल गया। विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल एक रक्षा समझौते तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से जुड़ा हुआ है। भारत और चीन जैसे देशों के लिए भी मलक्का स्ट्रेट अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग पर निर्भर करता है। बहरहाल रिपोर्ट सामने आने के बाद इंडोनेशिया के भीतर विरोध बढ़ा, जिससे सरकार को पीछे हटना पड़ा। फिलहाल, दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य में किसी भी ऐसे समझौते में इंडोनेशिया अपनी संप्रभुता और रणनीतिक हितों को लेकर अधिक सतर्क रहेगा। हिदायत/ईएमएस 17 अप्रैल 2026