राष्ट्रीय
17-Apr-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में मालवाहक जहाजों की सुरक्षा और वहां लगातार बढ़ते तनाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र में भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में आम नागरिकों की हत्या और व्यापारिक जहाजों पर मंडराता खतरा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। भारतीय प्रतिनिधि ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने और मध्य पूर्व में तनाव कम करने की पुरजोर वकालत की है। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय राजदूत हरीश पी ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से होने वाला समुद्री व्यापार भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर गहरा दुख जताया कि वर्तमान संघर्ष के दौरान व्यापारिक जहाजों को सैन्य हमलों का निशाना बनाया गया है। भारतीय राजदूत ने कहा कि इस युद्ध की स्थिति के कारण जहाजों पर कार्यरत कई भारतीय नाविकों को अपनी कीमती जान गंवानी पड़ी है, जो बेहद दुखद और चिंताजनक है। भारत ने स्पष्ट किया है कि बेगुनाह नाविकों की जान जोखिम में डालना या अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग में रुकावट पैदा करना वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा है। भारतीय प्रतिनिधि ने मांग की कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित और बेरोकटोक आवाजाही फिर से बहाल हो सके। 28 फरवरी 2026 को ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष की शुरुआत के बाद से ही भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव न बढ़ाने और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। भारत ने बातचीत और कूटनीति के जरिए शांति स्थापित करने और सभी देशों की संप्रभुता एवं सीमाओं के सम्मान की बात दोहराई है। गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव बढ़ रहा है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर वार्ता के दौरान इस जलमार्ग को खोलने की अंतरराष्ट्रीय मांग पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान होना चाहिए, वहीं दूसरी ओर समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता की गारंटी भी दी जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान में ईरान के साथ बातचीत विफल होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज पर नाकेबंदी का ऐलान कर दिया था, जिसके कारण कई जहाजों को वापस लौटना पड़ा। दूसरी तरफ, ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अपना पूर्ण नियंत्रण होने का दावा करता रहा है, जिससे क्षेत्र में सैन्य और कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है। वीरेंद्र/ईएमएस/17अप्रैल2026