- दुनिया की 20 फीसदी तेल सप्लाई वाले रास्ते पर बढ़ा खतरा, बुकिंग दरें तीन गुना बढ़ीं नई दिल्ली (ईएमएस)। मध्य-पूर्व में बीते सात हफ्तों से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध (तनातनी) ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है। इस भू-राजनीतिक खींचतान का सबसे बड़ा खामियाजा होरमुज जलडमरूमध्य को भुगतना पड़ रहा है, जहां से दुनिया का 20 फीसदी तेल गुजरता है। जहाजों के लिए बढ़ा जोखिम अब इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल ढुलाई को लगभग ठप कर चुका है, क्योंकि तेल उत्पादक और शिपिंग कंपनियां इस बात पर सहमत नहीं हो पा रही हैं कि इस जानलेवा रास्ते से गुजरने का जोखिम कौन उठाएगा। ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बिना उसकी अनुमति के होरमुज पार करने वाले किसी भी जहाज को जलसमाधि लेनी पड़ सकती है। इस धमकी ने तेल उत्पादकों और जहाज मालिकों दोनों को भयभीत कर दिया है, जिससे फारस की खाड़ी में लाखों बैरल तेल लिए टैंकरों को इंतजार करना पड़ रहा है। तेल उत्पादक कंपनियां अब शिप मालिकों से यह गारंटी मांग रही हैं कि लोडिंग या होरमुज पार करते समय होने वाले किसी भी नुकसान की जिम्मेदारी उनकी होगी। हालांकि, जहाज मालिक और शिप ब्रोकर्स इन मांगों को पूरी तरह गलत बता रहे हैं और उन पर सहमति जताने से इनकार कर रहे हैं। लंदन स्थित शिप ब्रोकर फियर्नलेस के निदेशक के अनुसार, दोनों पक्ष जोखिम की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल रहे हैं, जिससे कोई समाधान नहीं निकल पा रहा है। इस बीच, कुछ जहाज जोखिम से बचने के लिए ईरान या ओमान के तटों से आवाजाही कर रहे हैं, या अपने सैटेलाइट ट्रांसपोंडर्स बंद कर रहे हैं। होरमुज में बढ़ते जोखिम प्रीमियम के कारण जहाजों की बुकिंग दरें युद्ध शुरू होने से पहले के मुकाबले करीब तीन गुना बढ़कर 4.75 लाख डॉलर प्रतिदिन तक पहुंच गई हैं, जो पहले 1.60 लाख डॉलर थी। यह गतिरोध वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। सतीश मोरे/17अप्रैल ---