:: ओंकारेश्वर में एकात्म पर्व का शुभारंभ; 2400 करोड़ से आकार ले रहा अद्वैत लोक संग्रहालय :: इंदौर/ओंकारेश्वर (ईएमएस)। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि अद्वैत ज्ञान के सूर्योदय के केंद्र ओंकारेश्वर की चेतना की अनुभूति आज संपूर्ण विश्व को हो रही है। मध्यप्रदेश की पावन धरा ने ऐतिहासिक रूप से धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया है। आदि शंकराचार्य का दर्शन ही हमारी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक एकता का मुख्य आधार बना है। हमारी सनातन विरासत और शास्त्र परंपराएं यदि आज जीवित हैं, तो यह आदिगुरु के आशीर्वाद से ही संभव हुआ है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को ओंकारेश्वर के एकात्म धाम में आयोजित पांच दिवसीय एकात्म पर्व के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में द्वारका शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती, विवेकानंद केंद्र की उपाध्यक्ष पद्मश्री निवेदिता भिड़े और स्वामी शारदानंद सरस्वती सहित वरिष्ठ संतवृंद उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अद्वैत लोक व अक्षर ब्रह्म प्रदर्शनी का लोकार्पण किया तथा वैदिक अनुष्ठान में सम्मिलित हुए। :: वेबसाइट का लोकार्पण और शोध को बढ़ावा :: मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में एकात्म धाम के भावी स्वरूप पर केंद्रित वेबसाइट (oneness.mp.gov.in) का लोकार्पण किया। साथ ही रोहन अच्युत कुलकर्णी द्वारा लिखित पुस्तक वेदांतसिद्धान्तचन्द्रिका विथ उदग्र का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित है। दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय में भी एकात्मता का भाव झलकता है। यह पर्व आधुनिक पीढ़ी को अद्वैत दर्शन से जोड़ने का एक सफल प्रयास सिद्ध होगा। :: ग्लोबल सेंटर ऑफ वननेस के रूप में विकसित होगा ओंकारेश्वर :: आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के प्रो. जयकिशोर एस. शास्त्री ने बताया कि ओंकारेश्वर में 108 फीट की एकात्म प्रतिमा स्थापित हो चुकी है और अब 2400 करोड़ की लागत से अद्वैत लोक संग्रहालय का कार्य प्रगति पर है। इसे ग्लोबल सेंटर ऑफ वननेस बनाया जा रहा है। आगामी सिंहस्थ-2028 से पहले जनवरी से अप्रैल 2027 तक आचार्य शंकर के जन्मस्थान (केरल) से एकात्म यात्रा निकाली जाएगी। :: आत्मा से साक्षात्कार है एकात्मता : स्वामी सदानंद सरस्वती जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने एकात्म धाम की संकल्पना की सराहना करते हुए कहा कि प्राणी मात्र में परमात्मा का दर्शन करना ही एकात्मता है। व्यक्ति विश्व को जानना चाहता है, लेकिन अपनी आत्मा से साक्षात्कार नहीं करना चाहता। इस दौरान स्वामी शारदानंद सरस्वती ने आचार्य शंकर के अद्वैत सिद्धांत के महत्व पर प्रकाश डाला। विमर्श सभा में अद्वैत एवं Gen-Z जैसे समसामयिक विषयों पर भी संवाद हुआ, जिसमें एआई और आधुनिक पीढ़ी के परिप्रेक्ष्य में वेदांत की व्याख्या की गई। :: महोत्सव के मुख्य आकर्षण :: - 21 अप्रैल को 700 से अधिक युवा शंकर दूत के रूप में दीक्षा लेंगे। - 2400 करोड़ की लागत से बन रहा अद्वैत लोक। - अद्वैत दर्शन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की भूमिका पर मंथन। - एकात्म पर्व 21 अप्रैल तक निरंतर जारी रहेगा। प्रकाश/17 अप्रैल 2026 संलग्न चित्र - ओंकारेश्वर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ओंकारेश्वर में 5 दिवसीय एकात्म पर्व पर एकात्म धाम में पुस्तक वेदांतसिद्धान्तचन्द्रिका विथ उदग्र का विमोचन किया।