महिला आरक्षण बिल के पक्ष और परिसीमन के विरोध में एकजुट विपक्षी, दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाई सरकार महिला आरक्षण बिल: विपक्ष की जीत -मोदी सरकार पहली बार बिल पास कराने में नाकाम, बिल 54 वोट से गिरा...पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े नई दिल्ली(ईएमएस)। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल संसद में गिर गया। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर व्यापक चर्चा के बाद अब इस महत्वपूर्ण बिल पर शुक्रवार शाम को वोटिंग हुई। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, जिसमें 298 सांसदों ने इस विधेयक के समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट डाला। इस तरह बहुमत के आंकड़े 352 से बिल 54 वोट से गिर गया। जिसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा को शनिवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया है। 11 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा था कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। विपक्ष अगर वोट नहीं देगा तो बिल गिर जाएगा। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है। इन संशोधित बिलों पर लोकसभा में 21 घंटे चर्चा हुई। कुल 130 सांसदों ने अपने विचार रखें, इनमें 56 महिला सांसद थीं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि यह विधेयक दो-तिहाई सदस्यों द्वारा पारित नहीं हो सका। अब इस संविधान संशोधन विधेयक पर आगे की कार्यवाही करना संभव नहीं है। दो अन्य विधेयकों के संबंध में आगे की कार्यवाही पर सत्ता पक्ष द्वारा निर्णय लिया जाना है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने से जुड़ा ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण विधेयक था। इसी पर यह नतीजा आया है। विपक्ष ने इसमें साथ नहीं दिया। बहुत खेद की बात है। आपने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया। महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने का हमारा अभियान जारी रहेगा और हम उन्हें अधिकार दिलाकर ही रहेंगे। परिसीमन से महिला सशक्तिकरण नहीं: राहुल गांधी राहुल गांधी ने कहा कि परिसीमन से महिला सशक्तिकरण नहीं हो सकता है। राहुल गांधी ने इस दौरान कहा कि पुराना बिल लाइए, हम उसे पास कराएंगे। चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि सरकार देश के ओबीसी भाई-बहनों को ताकत नहीं देना चाहती है, ये एससी-एसटी के अधिकार छीनने की कोशिश है। राहुल गांधी ने कहा कि यह विधेयक देश के चुनावी मानचित्र को बदलने का एक प्रयास है; इसके लिए भारत की महिलाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है और उनकी आड़ ली जा रही है। जब कानून था ही नहीं तो संशोधन कैसा महिला आरक्षण बिल को 2023 में लोकसभा और राज्यसभा में पास किया गया था। इसके बाद राष्ट्रपति ने भी मंजूरी दे दी लेकिन इसके बावजूद यह कानून संविधान का हिस्सा नहीं बना था। क्योंकि कोई कानून तब तक लागू नहीं माना जाता जब तक सरकार राजपत्र (गजट) में उसको लागू करने की तारीख अधिसूचित न कर दे। अब नोटिफिकेशन जारी होने के बाद कानून तो लागू हो गया है लेकिन इसे मौजूदा लोकसभा में लागू नहीं किया जा सकता। कानून के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, अगली जनगणना और उसके आधार पर परिसीमन (सीटों का पुनर्गठन) होगा। इसके बाद ही आरक्षण लागू किया जाएगा। इस प्रक्रिया के कारण आरक्षण 2034 तक लागू होने की संभावना जताई गई थी। आज से इंडिया ब्लॉक के नेताओं का घेराव महिला आरक्षण से जुड़े तीन बिल मतदान के दौरान गिर गए। इस बिल के लोकसभा में गिर जाने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की महिला सांसदों ने विपक्ष के खिलाफ प्रोटेस्ट किया। संसद के मकर द्वार से यह प्रोटेस्ट शुरू हुआ। अब बीजेपी और एनडीए में शामिल दलों के कार्यकर्ता कल यानी 18 अप्रैल से इंडिया ब्लॉक से जुड़ी पार्टियों के नेताओं के घर के बाहर प्रोटेस्ट करेंगे। विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया महिला आरक्षण से जुड़े तीन बिल मतदान के दौरान गिरने के बाद विपक्ष ने कहा कि हमने सरकार को हरा दिया। राहुल गांधी ने कहा कि हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ तौर पर कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है। प्रियंका गांधी ने कहा कि यह हमारे लोकतंत्र और हमारे देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है। शशि थरूर ने कहा कि हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। एमके स्टालिन ने कहा कि 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे। विनोद उपाध्याय / 17 अप्रैल, 2026