महिला आरक्षण को लेकर हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने भारतीय लोकतंत्र के कई अहम सवालों को केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है। 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के नाम से पहचान मिली। इस बिल को लागू करने में सरकार ने सुनयोजित रूप से देरी की। संसद से बिल पास होने के बाद सरकार ने अधिसूचना तक जारी नहीं की थी। बिल में प्रावधान था की जनगणना और परिसीमन के बाद इसे लागू किया जाएगा। पिछले 3 साल में सरकार ने इसका कोई प्रयास नहीं किया। पांच राज्यों के जब चुनाव चल रहे, तब अचानक महिला आरक्षण बिल की आड़ में परिसीमन के अधिकार सरकार अपने हाथ में लेना चाह रही थी। इसके लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। सरकार ने विपक्ष को महिला बिल की आड़ में भ्रमित करने का प्रयास किया था। विपक्ष इसको समझ गया। पिछले 12 साल में पहली बार विपक्ष एकजुट हुआ। सरकार द्वारा अचानक संशोधन बिल लाकर उसे पास कराने की कोशिश की। सरकार को ओवर कॉन्फिडेंस था। पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभी मतदान होना शेष हैं, ऐसे समय विपक्ष चाह कर भी इसका विरोध नहीं कर पाएगा। सरकार की यह मंशा पूरी नहीं हुई, उल्टा सरकार बुरी तरह से घिर गई है। लोकसभा में आवश्यक बहुमत के अभाव में बिल का अटक जाना, सरकार की रणनीति और भविष्य की राजनीति को लेकर सरकार ने बहुत बड़ा जोखिम उठा लिया है। सरकार ने 2023 मे जब इस विधेयक को पारित कराया था, उसमें प्रावधान था। आरक्षण लागू करने के पूर्व जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद महिला आरक्षण लागू किया जाएगा। पिछले तीन वर्षों में सरकार ने जनगणना का काम शुरू नहीं किया। जब तक जनगणना नहीं होगी तब तक परिसीमन को लेकर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो सकती है। जब मूल कानून की अधिसूचना जारी नहीं हुई, तब उसमें संशोधन लाना ही नियमानुसार नही था। यह स्वाभाविक था, विपक्ष इस पर आपत्ति दर्ज कराए। सरकार क्या स्वयं चाहती थी कि महिला आरक्षण लागू नहीं किया जाए। इसका मुख्य कारण विपक्षी दलों द्वारा जातिगत जनगणना की मांग कर जाति के आधार पर महिला आरक्षण की मांग करना। संसद में हुई बहस ने एक महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किया है, वो यह कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। विपक्ष आरक्षण की शर्तों और प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष की मांग थी, सरकार वर्तमान सांसदों की संख्या के आधार पर ही महिला आरक्षण लागू करे। विपक्ष महिला आरक्षण अनिश्चित काल तक टालने का शुरू से ही विरोध करता रहा है। इसके विपरीत सरकार परिसीमन को अनिवार्य शर्त बनाकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहती है। जिससे संदेह पैदा हुआ, सरकार महिला आरक्षण के मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए महिला आरक्षण बिल से जोड़कर तीन संशोधन विधेयक लेकर आई। जिसके कारण विपक्ष काफी आक्रामक हो गया। मतदान मे सरकार को दो-तिहाई बहुमत न मिलना इस बात का संकेत है, संसद में सरकार और विपक्ष के बीच में सहमति का अभाव है। 298 मत समर्थन में और 230 मत विरोध में पड़ना बताता है, मुद्दा केवल संख्या का नहीं, बल्कि विश्वास और पारदर्शिता का भी है। पिछले एक दशक में शायद ही ऐसा अवसर आया हो, जब विपक्ष इतनी एक जुटता के साथ सरकार को चुनौती देता हुआ नजर आया हो। यह घटनाक्रम महिला आरक्षण विधेयक तक सीमित नहीं है। भविष्य में इसके दूरगामी राजनीतिक परिणाम भी होंगे। देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, आर्थिक असमानता के कारण जन असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अस्पष्टता और जल्दबाजी से लिया गया निर्णय भविष्य में सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकता है। सत्ता पक्ष इसे विपक्ष की नकारात्मक राजनीति के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। सच्चाई यह है, लोकतंत्र में कानून निर्माण केवल बहुमत का खेल नहीं है। लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच में सहमति और विश्वास जरूरी होता है। सरकार हमेशा एक बात को भूल जाती है। सरकार से ज्यादा समर्थन विपक्ष के पास होता है। विपक्ष हमेशा बिखरा हुआ होता है, जिसके कारण वह सत्ता के सिंहासन पर नहीं पहुंच पाता है। सरकार बिना विपक्ष के सहयोग के आगे नहीं बढ़ सकती है। इस बात का ध्यान भी सरकार को रखना होता है। सरकार वास्तव में महिला सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्ध है। उसे पारदर्शी तरीके से जनगणना, परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया को स्पष्ट और तय समय सीमा में लागू करना होगा। आगामी विधानसभा चुनावों में यह मुद्दा निश्चित रूप से राजनीतिक बहस का केंद्र बनेगा, खासकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण है, सरकार और विपक्ष को मिलकर इस ऐतिहासिक पहल को वास्तविकता में बदलना होगा। महिला आरक्षण का जिन्न बोतल से बाहर आ चुका है। इसे दबा पाना किसी भी राजनीतिक दल के लिए संभव नहीं है। यह सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का मामला है। इस टकराव का समाधान सहमति और गंभीरता से निकाला जाना ही देश हित में होगा। ईएमएस/18 अप्रैल 26