मनोरंजन
19-Apr-2026
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मुंबई (ईएमएस)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को सांसद एवं बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने न केवल ऐतिहासिक करार दिया, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की जमकर सराहना की। कंगना ने कहा कि यह कानून वास्तव में भारतीय महिलाओं के लिए एक नए और स्वर्णिम युग की शुरुआत है। विधेयक के दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डालते हुए कंगना ने कहा, यह बिल महिलाओं के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और उन्हें राजनीति के साथ-साथ सत्ता के महत्वपूर्ण पदों पर भी पुरुषों के समान भागीदारी सुनिश्चित करेगा। अब महिलाओं को अच्छे और प्रभावशाली पदों पर जगह मिलेगी, जिससे वे देश के विकास में अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान दे सकेंगी। यह हमारा सौभाग्य है कि हम इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बन रहे हैं और अपनी आंखों से इसे साकार होते देख रहे हैं। विपक्ष की संभावित आलोचनाओं पर कंगना ने अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा कि यह काम प्रधानमंत्री मोदी की वजह से ही संभव हो पाया है। उन्होंने कहा, विपक्ष ने तो हमेशा इस बिल को रोकने की कोशिश की है और इसे लागू होने से टाला है। इसलिए, यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि वे इसमें टांग अड़ाने की कोशिश न करेंगे, लेकिन अब यह विधेयक कानून का रूप ले चुका है। वहीं, बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री अमीषा पटेल ने भी इस बिल का भरपूर समर्थन किया। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाएं ही देश के आम लोगों की वास्तविक समस्याओं, विशेषकर घर-परिवार और समाज से जुड़ी छोटी-बड़ी मुश्किलों को सबसे बेहतर तरीके से समझ सकती हैं और उनके समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा, देश की प्रगति और समग्र विकास के लिए महिलाओं की आवाज़ सुनना बहुत ज़रूरी है। जब भी किसी क्षेत्र में महिलाओं की प्रगति होती है और उन्हें ज्यादा समर्थन मिलता है, तो मुझे बहुत खुशी होती है। चाहे वह नौकरी का क्षेत्र हो या संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच, जब उनकी आवाज़ सुनी जाती है और उन्हें पर्याप्त मौके दिए जाते हैं, तो यह समाज के लिए बहुत अच्छा संकेत है। 33 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए। महिलाओं का समर्थन करना बेहद ज़रूरी है, और मैं इसका पूरे दिल से समर्थन करती हूं। फेमिना मिस इंडिया हरियाणा की विजेता देबास्मिता ने भी इस विधेयक को महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और संसद को ज्यादा समावेशी बनाने वाला एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमारे प्राचीन वेदों में भी महिलाओं को समाज का एक अनिवार्य और सम्माननीय अंग माना गया है, और यह विधेयक उसी प्राचीन गरिमा को आधुनिक संदर्भ में पुनर्स्थापित करता है। उन्होंने कहा, सरकार द्वारा लाया गया यह आरक्षण विधेयक एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल महिलाओं की संख्यात्मक भागीदारी को बढ़ाएगा, बल्कि संसद को वैचारिक रूप से भी अधिक समावेशी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाएगा। सुदामा/ईएमएस 19 अप्रैल 2026